नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने दिल्ली में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी, स्पष्ट और जनहितकारी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) अधिनियम, 1957 की चौदहवीं अनुसूची में संशोधन कर एमसीडी के जोनों के नामों को नए राजस्व जिला नामकरण के अनुरूप कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के तहत सभी 250 वार्डों और उनके संबंधित जोनों का संशोधित विवरण अधिसूचित किया गया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम दिल्ली में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक स्पष्ट, सुगम और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। उन्होंने कहा कि राजस्व प्रशासन और नगर निगम प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने से योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी तथा नागरिकों को सरकारी सेवाओं का लाभ अधिक सरलता से मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के विजन के अनुरूप शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। प्रशासनिक क्षेत्रों के नामों में एकरूपता से विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा और सुशासन को मजबूती मिलेगी।
गौरतलब है कि दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग ने 25 दिसंबर 2025 की अधिसूचना के माध्यम से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में 39 उपमंडल (तहसील) और 13 राजस्व जिले बनाए थे। इन्हें एमसीडी के 12 जोनों, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) तथा दिल्ली छावनी क्षेत्र के अनुरूप व्यवस्थित किया गया था। अब उसी क्रम में एमसीडी के जोनों का नामकरण भी नए राजस्व जिला ढांचे के अनुरूप कर दिया गया है।
संशोधित व्यवस्था के अनुसार एमसीडी के 12 जोन अब बाहरी उत्तर, उत्तर, उत्तर-पश्चिम, मध्य उत्तर, पुरानी दिल्ली, मध्य, पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण, पूर्व और उत्तर-पूर्व नामों से जाने जाएंगे। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से विभागीय समन्वय मजबूत होगा और नागरिक सेवाओं के संचालन में अधिक दक्षता आएगी।
