कर्मचारियों के ESI का पैसा कहां जा रहा है? नाज़िया दानिश ने निगम से मांगा हिसाब

वेतन से कटौती, खातों में रकम नहीं पहुंचने का आरोप; कांग्रेस नेत्री बोलीं—कर्मचारियों की मेहनत की कमाई से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम के कर्मचारियों से ESI के नाम पर वेतन से की जा रही कथित कटौती को लेकर कांग्रेस नेत्री और निगम में नेता प्रतिपक्ष नाज़िया दानिश ने निगम प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया है कि यदि कर्मचारियों के वेतन से हर महीने ESI की राशि काटी जा रही है और वह उनके ESI रिकॉर्ड में जमा दिखाई नहीं दे रही, तो आखिर यह पैसा जा कहां रहा है?

नाज़िया दानिश ने कहा कि कर्मचारियों के वेतन से काटी जाने वाली राशि का पूरा हिसाब निगम प्रशासन को देना होगा। उन्होंने मांग की कि प्रत्येक कर्मचारी की वेतन पर्ची, ESI चालान और ESIC रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए, ताकि कथित गड़बड़ी की वास्तविकता सामने आ सके।ESIC के आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार ESI में कर्मचारी का योगदान 0.75 प्रतिशत और नियोक्ता का योगदान 3.25 प्रतिशत है। नियोक्ता को निर्धारित समयसीमा में दोनों हिस्सों का योगदान जमा करना होता है।

“कटौती हो रही है तो कर्मचारियों के खाते में रकम क्यों नहीं?”

नाज़िया दानिश ने कहा कि निगम के हजारों कर्मचारियों के वेतन से यदि ESI के नाम पर पैसा काटा जा रहा है, तो उस पैसे का रिकॉर्ड भी कर्मचारियों को मिलना चाहिए। उन्होंने पूछा कि निगम बताए कि संबंधित महीनों में कर्मचारियों से कितनी राशि काटी गई, कितनी रकम ESIC में जमा की गई और कितने कर्मचारियों के रिकॉर्ड में उसका योगदान दर्ज हुआ।उन्होंने कहा कि यह केवल कागजी रिकॉर्ड का मामला नहीं है। ESI कर्मचारियों और उनके परिवारों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्था है। ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही या वित्तीय अनियमितता सीधे कर्मचारियों के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है। ESIC स्वयं ESI योजना को कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवच के रूप में वर्णित करता है।

नाज़िया बोलीं—एक-एक रुपये का हिसाब दे निगम

कांग्रेस नेत्री ने निगम प्रशासन से मांग की कि पिछले वर्षों में कर्मचारियों के वेतन से काटी गई ESI राशि का महीनेवार और कर्मचारीवार ऑडिट कराया जाए। साथ ही ESI चालान, भुगतान की तारीख और कर्मचारियों के खातों में अपडेट की स्थिति सार्वजनिक की जाए।उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या एजेंसी की भूमिका सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए।नाज़िया दानिश ने सवाल उठाया—“कर्मचारी के वेतन से पैसा काटा गया है तो उसका हिसाब भी कर्मचारी को मिलना चाहिए। अगर पैसा ESI खाते में नहीं पहुंचा, तो निगम बताए कि आखिर कर्मचारियों की मेहनत की कमाई का वह पैसा गया कहां?”

मामला सामने आने के बाद निगम की ESI व्यवस्था और कर्मचारियों के वेतन से होने वाली कटौती का रिकॉर्ड अब जांच के घेरे में है।