अधिकारियों से नाराज भाजपा पार्षद, सदन में खुली प्रशासनिक व्यवस्था की पोल

अधिकारी नहीं सुनते तो फिर किसके भरोसे चलेगा निगम? भाजपा पार्षदों के सवालों से एमसीडी प्रशासन कठघरे में

नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम सदन की बैठक में सोमवार को सत्तारूढ़ भाजपा के पार्षदों की अधिकारियों के प्रति नाराजगी ने निगम प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सदन में एक के बाद एक भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा पार्षदों की शिकायतों और सवालों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। हालात यह रहे कि जिन अधिकारियों से सदन में जवाब मांगा जा रहा था, वे खुद सदन में मौजूद नहीं थे।

भाजपा के वरिष्ठ पार्षद मुकेश गोयल ने जन स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अल्पकालिक प्रश्न का जवाब नहीं मिलने पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सदन में किसी विषय पर चर्चा के लिए निर्धारित समय के भीतर प्रश्न लगाया जाता है तो उसका जवाब उपलब्ध कराना निगम प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद संबंधित विभाग के अधिकारी की गैरमौजूदगी और जवाब नहीं मिलने से सदन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए।

इसी मुद्दे पर नेता सदन जयभगवान यादव ने भी कहा कि उन्होंने निर्धारित समय से काफी पहले प्रश्न भेज दिया था, लेकिन इसके बावजूद संबंधित जानकारी सदन में उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे साफ है कि पार्षदों द्वारा उठाए जा रहे सवालों को अधिकारी कितनी गंभीरता से लेते हैं।

वहीं भाजपा पार्षद नरेंद्र गिरसा ने प्रतिनियुक्ति पर निगम में आए अधिकारियों के रवैये को लेकर नाराजगी जताई। उनका आरोप था कि कई अधिकारी पार्षदों को तवज्जो नहीं देते और उनके साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार करते हैं। सदन में सत्तापक्ष के पार्षदों की ओर से अधिकारियों के खिलाफ इस तरह खुलकर नाराजगी जताया जाना निगम के अंदर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बढ़ते तनाव का संकेत माना जा रहा है।

भाजपा की सरकार, फिर भी अधिकारी नहीं सुन रहे—आप ने ली चुटकी

भाजपा पार्षदों की नाराजगी पर आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने भी चुटकी लेने में देर नहीं की। आप पार्षदों ने कहा कि सत्ता में भाजपा होने के बावजूद उसके अपने पार्षद यदि अधिकारियों की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं तो इससे निगम प्रशासन की वास्तविक स्थिति समझी जा सकती है। आप ने इसे भाजपा और निगम अधिकारियों के बीच बढ़ती दूरी का संकेत बताया।

विधानसभा में भी उठ चुके हैं सवाल

सफाई व्यवस्था और लावारिस पशुओं से जुड़े मुद्दे दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र में भाजपा विधायकों द्वारा भी उठाए जा चुके हैं। इन मामलों में स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा ने निगम आयुक्त को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बावजूद अब निगम सदन में सत्तारूढ़ दल के पार्षदों द्वारा अधिकारियों की कार्यशैली और जवाबदेही पर सवाल उठाए जाने से प्रशासनिक व्यवस्था पर नए सिरे से बहस शुरू हो गई है। सवाल यह है कि जब सत्तारूढ़ दल के पार्षदों को ही अधिकारियों से जवाब लेने के लिए सदन में आवाज उठानी पड़ रही है, तो आम दिल्लीवासी अपनी शिकायतों और समस्याओं के समाधान के लिए किस दरवाजे पर जाए?