नंदलाल के जन्म पर गूंजा भोलानाथ नगर, जय श्रीकृष्ण के जयकारों से भक्तिमय हुआ श्री दुर्गा मंदिर
पुजारी नीरज अवस्थी के सानिध्य में भव्य आयोजन; मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म पर महाआरती, छप्पन भोग और उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
पूर्वी दिल्ली, 4 सितंबर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर पांडव रोड, गली नंबर-16, भोलानाथ नगर स्थित श्री दुर्गा मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव श्रद्धा, उल्लास और भक्ति के साथ मनाया गया। मंदिर पुजारी नीरज अवस्थी के सानिध्य में आयोजित समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और भगवान श्रीकृष्ण के अलौकिक स्वरूप के दर्शन किए।
जन्माष्टमी को लेकर मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। भगवान श्रीकृष्ण सहित मंदिर में विराजमान देवी-देवताओं का विशेष श्रृंगार किया गया। शाम होते ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी। भजन-कीर्तन और धार्मिक जयकारों से पूरा वातावरण कृष्णमय हो गया।
12 बजते ही गूंजा ‘जय श्रीकृष्ण’
रात्रि 12 बजे जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का शुभ क्षण आया, मंदिर परिसर ‘जय श्रीकृष्ण’, ‘राधे-राधे’ और ‘हरे कृष्णा-हरे कृष्णा’ के जयकारों से गूंज उठा। शंखनाद और घंटियों के बीच भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। इसके बाद विधिवत महाआरती की गई तथा भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया गया।
पुजारी नीरज अवस्थी ने दिया श्रीकृष्ण के संदेश को अपनाने का आह्वान
इस अवसर पर मंदिर पुजारी नीरज अवस्थी ने श्रद्धालुओं को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन मानवता को धर्म, सत्य, कर्तव्य और कर्म का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हम केवल उत्सव मनाने तक सीमित न रहें, बल्कि श्रीकृष्ण के विचारों को अपने जीवन में उतारें।उन्होंने कहा कि “श्रीकृष्ण ने कर्म को प्रधानता दी। हमें भी अपने कर्तव्यों का ईमानदारी और निष्ठा से पालन करते हुए समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को बढ़ाना चाहिए।”
नीरज अवस्थी ने श्रद्धालुओं से अपील की कि धार्मिक पर्व समाज को जोड़ने और संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनें। उन्होंने कहा कि “हमारे मंदिर केवल पूजा के स्थान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संस्कार और सनातन परंपराओं के केंद्र हैं। बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ना हम सभी की जिम्मेदारी है।”
भक्ति के साथ सामाजिक सद्भाव का संदेश
पुजारी नीरज अवस्थी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संदेश हर वर्ग को प्रेम और सद्भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। जन्माष्टमी जैसे पर्व समाज में आपसी भाईचारा मजबूत करने का अवसर हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों पर चलने और जरूरतमंदों की सेवा करने का आह्वान किया।
देर रात तक भक्तिरस में डूबा मंदिर
जन्मोत्सव के बाद श्रद्धालुओं ने भव्य आरती में हिस्सा लिया और भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया। प्रसाद वितरण के दौरान भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। देर रात तक मंदिर परिसर राधे-राधे और जय श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंजता रहा।मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद भव्य महाआरती की गई। भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया गया और श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।
