नालों की सफाई और जल निकासी के दावों का जमीन पर असर नहीं दिखा, हर बारिश में जनता भुगत रही खामियाजा : नाज़िया दानिश

दो-तीन घंटे की बारिश ने भाजपा सरकार के दावों की खोली पोल, छुट्टी के दिन भी दिल्ली बनी जाम का शहर

नई दिल्ली, 4 सितंबर। राजधानी में शुक्रवार को हुई दो-तीन घंटे की बारिश ने दिल्ली सरकार के मानसून पूर्व तैयारियों और जल निकासी के दावों की पोल खोल दी। जगह-जगह जलभराव के कारण सड़कों पर भारी जाम लग गया और त्योहार की छुट्टी के बावजूद दिल्लीवासियों को घंटों परेशान होना पड़ा। कांग्रेस नेत्री एवं MCD में नेता प्रतिपक्ष नाज़िया दानिश ने जलभराव और यातायात अव्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला।

नाज़िया दानिश ने कहा कि सरकार हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई, जल निकासी और जलभराव रोकने की तैयारियों को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन बारिश की कुछ घंटों की बौछार ही इन दावों की असलियत सामने ले आती है। उन्होंने कहा कि जब त्योहार की छुट्टी के दिन भी दिल्ली जलभराव और जाम से कराह रही है, तो सामान्य कार्यदिवस में राजधानी की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि मानसून खत्म होने के कगार पर है, लेकिन भाजपा सरकार की नींद अभी तक नहीं खुली है। दिल्ली की जनता हर बारिश में जलभराव, जाम और बदहाल सड़कों की समस्या झेलने को मजबूर है। संवेदनशील जलभराव वाले इलाकों की पहचान करने और स्थायी जल निकासी की व्यवस्था करने के दावों का असर जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है।

नाज़िया दानिश ने सवाल उठाया कि मानसून से पहले नालों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई पर खर्च किए गए धन के बावजूद दिल्ली की सड़कें बारिश के कुछ घंटों में जलमग्न क्यों हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि केवल बैठकों, घोषणाओं और दावों से दिल्ली की समस्या दूर नहीं होगी। सरकार को जलभराव और ट्रैफिक जाम का स्थायी समाधान निकालने के लिए ठोस और जवाबदेह व्यवस्था लागू करनी होगी।उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता को हर बारिश में जलभराव और जाम की सजा देना भाजपा सरकार की गंभीर प्रशासनिक विफलता है। सरकार को बयानबाजी से बाहर निकलकर जमीन पर काम करना चाहिए, ताकि राजधानी के लोगों को हर मानसून में इसी परेशानी से न गुजरना पड़े।