सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत ढही, तीन की मौत
मलबे से नौ लोग सुरक्षित निकाले गए, कई के दबे होने की आशंका; NDRF, सेना, दमकल और MCD समेत कई एजेंसियों का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन मार्केट में रविवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया। नानकपुरा गुरुद्वारे के पास बेसमेंट समेत पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। इमारत में छात्रों के लिए ‘हॉस्टल डेज’ नाम से पीजी संचालित होने की जानकारी सामने आई है। हादसे के बाद पूरी इमारत कुछ ही पलों में मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि नौ लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया है। कई अन्य लोगों के दबे होने की आशंका के चलते देर रात तक युद्धस्तर पर बचाव अभियान जारी रहा।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, रविवार दोपहर करीब 1:34 बजे दक्षिण कैंपस थाना पुलिस को इमारत गिरने की सूचना मिली। दमकल विभाग को करीब 1:33 बजे घटना की जानकारी मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल, CAT एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकल की करीब 12 गाड़ियां रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाई गईं।

हादसे की गंभीरता को देखते हुए NDRF की टीम ने मोर्चा संभाला। विशेष उपकरणों और डॉग स्क्वॉड की मदद से मलबे में फंसे लोगों की तलाश की गई। DDMA, MCD, सिविल डिफेंस समेत कई एजेंसियां भी राहत कार्य में जुटीं। भारी मलबे को बेहद सावधानी से हटाया गया। सेना के जवान भी बड़ी हाइड्रा मशीन लेकर मौके पर पहुंचे।
एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचे आठ घायल
रेस्क्यू किए गए घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया। एम्स ट्रॉमा सेंटर में आठ मरीजों को लाए जाने की जानकारी सामने आई, जिनमें तीन को मृत घोषित किया गया। घटनास्थल पर लगातार मलबा हटाकर संभावित लोगों की तलाश की जाती रही।
40 से 60 साल पुरानी बताई जा रही इमारत
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इमारत करीब 40 से 60 वर्ष पुरानी थी। इसमें बेसमेंट के अलावा पांच ऊपरी मंजिलें थीं। हादसे के समय बेसमेंट में मरम्मत अथवा निर्माण से जुड़ा काम चलने की बात सामने आई है। हालांकि, बेसमेंट में चल रहे काम और इमारत ढहने के बीच कोई सीधा संबंध था या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
बताया जा रहा है कि प्रत्येक मंजिल पर करीब तीन कमरे थे और एक कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे। दूसरी मंजिल पर किचन और मेस भी संचालित होने की जानकारी सामने आई है। पीजी में दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज, वेंकटेश्वर कॉलेज समेत अन्य कॉलेजों के छात्र रहते थे।
पीजी संचालन और भवन सुरक्षा पर गंभीर सवाल
हादसे के बाद इमारत की संरचनात्मक मजबूती, पीजी संचालन की अनुमति, बेसमेंट में चल रहे निर्माण कार्य और सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि इमारत का स्ट्रक्चरल ऑडिट हुआ था या नहीं, बेसमेंट में काम की अनुमति थी या नहीं और पीजी में रहने वाले छात्रों की संख्या के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी या नहीं।
हादसे के बाद इसी कंपनी की दूसरी पीजी संपत्ति को लेकर भी छात्रों में चिंता देखी गई। कंपनी की ओर से दूसरी इमारत में मौजूद छात्रों के सुरक्षित होने की बात कही गई। पीजी में छात्रों से करीब 13 हजार से 18 हजार रुपये प्रतिमाह किराया लिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
CM- LG मौके पर पहुंचे, PM और गृह मंत्री ने जताया दुख
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान का जायजा लिया और अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के निर्देश दिए।
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को बचाव अभियान में पूर्ण समन्वय के निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री, दिल्ली पुलिस आयुक्त और NDRF महानिदेशक से बातचीत कर राहत एवं बचाव अभियान की जानकारी ली।
बिल्डिंग मालिक के खिलाफ मामला दर्ज
पुलिस ने बिल्डिंग मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी में मालिक का नाम आनंद बंसल बताया गया है, जो गुरुग्राम में रहता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इमारत किन परिस्थितियों में गिरी।
जांच के दायरे में भवन की संरचनात्मक सुरक्षा, निर्माण और मरम्मत की अनुमति, बेसमेंट में चल रहा काम, पीजी संचालन की वैधता और इमारत में रहने वाले छात्रों की वास्तविक संख्या समेत कई बिंदु शामिल हैं।
पुरानी इमारतों की सुरक्षा फिर कठघरे में
सत्य निकेतन की यह घटना राजधानी में पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है। हादसे ने यह सवाल भी सामने ला दिया है कि दिल्ली में पुरानी इमारतों की नियमित जांच और स्ट्रक्चरल ऑडिट की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। अब जांच रिपोर्ट से साफ होगा कि यह हादसा महज इमारत की कमजोरी का नतीजा था या इसके पीछे नियमों की अनदेखी और लापरवाही भी जिम्मेदार थी।
