भारत मंडपम में गूंजेगी ‘महावीर कथा 3.1’, राजा हस्तिपाल की भूमिका निभाएंगे मनोज कुमार जैन
15 नवंबर को होगा भगवान महावीर के निर्वाण प्रसंग का भव्य मंचन, अहिंसा और करुणा का संदेश जन-जन तक पहुंचाने की पहल
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर।जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जीवन, अंतिम उपदेश और निर्वाण प्रसंग को मंच पर जीवंत करने के लिए 15 नवंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में ‘महावीर कथा 3.1—भगवान महावीर निर्वाण कथा’ का भव्य आयोजन किया जाएगा। भगवान महावीर देशना फाउंडेशन एवं बीआरजे प्रोडक्शन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में मनोनीत निगम पार्षद एवं फाउंडेशन के निदेशक मनोज कुमार जैन राजा हस्तिपाल की ऐतिहासिक भूमिका निभाएंगे।

इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण राजा हस्तिपाल के रूप में मनोज कुमार जैन की प्रस्तुति होगी। जैन परंपरा में राजा हस्तिपाल का संबंध भगवान महावीर स्वामी के अंतिम समय और उनके निर्वाण प्रसंग से जुड़ा हुआ है। आयोजकों के अनुसार, इस ऐतिहासिक पात्र के माध्यम से भगवान महावीर के जीवन के महत्वपूर्ण अध्याय को मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। इससे नई पीढ़ी को जैन धर्म के इतिहास, आध्यात्मिक परंपराओं और भगवान महावीर के अंतिम उपदेशों से परिचित कराने का प्रयास होगा।

जैन आगम ‘कल्पसूत्र’ की परंपरा के अनुसार, भगवान महावीर स्वामी ने अपना अंतिम चातुर्मास पावापुरी में राजा हस्तिपाल की लेखशाला में व्यतीत किया था। उनके जीवन के इस महत्वपूर्ण प्रसंग को कथा और नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से दर्शकों के सामने लाने की तैयारी की गई है।

कार्यक्रम में मुख्य कथा-वाचन सीए राजीव जैन करेंगे। वे भगवान महावीर के जीवन-दर्शन, उनके उपदेशों और निर्वाण की महत्ता को कथा के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे। फाउंडेशन के निदेशक अनिल जैन (सीए) और सुभाष ओसवाल का आयोजन को दिशा देने में मार्गदर्शन रहेगा।
प्रसिद्ध गीतकार एवं संगीतकार प्रदीप जैन की संगीतबद्ध रचनाएं कार्यक्रम को संगीतमय स्वरूप देंगी। वहीं, अभीषा जैन और बीना जैन सूत्रधार की भूमिका निभाते हुए कथा के विभिन्न प्रसंगों को दर्शकों से जोड़ेंगी।

‘महावीर कथा 3.1’ का उद्देश्य भगवान महावीर के जीवन और उनके शाश्वत संदेशों को व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाना है। आयोजन के माध्यम से अहिंसा, सत्य, करुणा और मानवीय मूल्यों की प्रासंगिकता को रेखांकित किया जाएगा।
आयोजकों को उम्मीद है कि भारत मंडपम में होने वाला यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारतीय आध्यात्मिक विरासत और जैन संस्कृति के प्रचार-प्रसार का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।
