नई दिल्ली। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के लिए बेडशीट और पिलो कवर की खरीद से जुड़े लिनेन-1 टेंडर को लेकर स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) और सेंट्रल प्रिक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं बरती गईं और कुछ कंपनियों को कथित तौर पर अनुचित तरीके से बाहर कर दिया गया।
विपिन कॉटेज इंडस्ट्रीज ने मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में दावा किया है कि उसने निर्धारित प्रक्रिया के तहत बेडशीट और पिलो कवर के सैंपल जमा कराए थे, जिसकी रिसीविंग भी उसके पास मौजूद है। इसके बावजूद कंपनी को यह कहते हुए टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया कि उसने सैंपल जमा नहीं किए। शिकायतकर्ता का कहना है कि मामले की शिकायत डीजीएचएस निदेशक डॉ. वत्सला अग्रवाल से भी की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि टेंडर तीन ऐसी संस्थाओं—लक्ष्मी ग्रामोद्योग संस्थान, संगम ग्रामोद्योग समिति और ग्रामीण सेवा संस्थान—को दिया गया, जिनका संचालन कथित तौर पर एक ही मालिक द्वारा किया जाता है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।
बेडशीट की गुणवत्ता और शर्तों पर भी सवाल
टेंडर की शर्तों को लेकर भी विवाद सामने आया है। आरोप है कि सीपीए ने पहली बार बेडशीट में पॉलिस्टर मिश्रण अनिवार्य करने की शर्त रखी, जिससे कई कंपनियां प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गईं। कुछ चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में मरीजों के लिए सूती (कॉटन) बेडशीट अधिक उपयुक्त होती हैं, जबकि पॉलिस्टर मिश्रित कपड़े से त्वचा संबंधी समस्याओं की आशंका बढ़ सकती है।
खरीद मूल्य को लेकर भी उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिन बेडशीटों को पहले सरकारी अस्पताल लगभग 315 रुपये प्रति यूनिट में खरीद रहे थे, उन्हें सीपीए ने 417 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदा। वहीं दावा किया गया है कि इसी तरह की बेडशीटें अन्य सरकारी संस्थानों में इससे काफी कम कीमत पर खरीदी गई हैं। आरोप यह भी है कि संबंधित कंपनियों को भुगतान प्रक्रिया में विशेष प्राथमिकता दी गई।
कोर्ट जाने की चेतावनी
विपिन कॉटेज इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक विपिन गोयल ने कहा है कि यदि मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
हालांकि, इन आरोपों पर डीजीएचएस और सीपीए की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की सत्यता और आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
