नई दिल्ली। दिल्ली में इन दिनों अवैध निर्माणों पर बुलडोजर और सीलिंग अभियान पूरे जोर-शोर से चल रहा है, लेकिन गाजीपुर के एक होटल का मामला किसी राजनीतिक थ्रिलर से कम नहीं दिख रहा। यहां होटल पर हुई कार्रवाई से ज्यादा चर्चा उन कथित दबावों और सिफारिशों की हो रही है, जो कार्रवाई के दौरान सामने आने की बातें कही जा रही हैं।
बताया जाता है कि गाजीपुर डेयरी फार्म इलाके में एक होटल बिना जरूरी अनुमतियों के संचालित हो रहा था। निगम की टीम कार्रवाई के लिए पहुंची तो मामला सीधा प्रशासनिक न रहकर राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया। देखते ही देखते होटल के बाहर से ज्यादा गर्मी निगम के दफ्तरों में महसूस होने लगी।
सूत्रों की मानें तो कार्रवाई के बीच फोन कॉल, मुलाकातों और सिफारिशों का दौर भी चलता रहा। निगम के कुछ अधिकारियों के बीच चर्चा रही कि होटल को बचाने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए गए। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दिलचस्प बात यह रही कि जिस होटल पर कार्रवाई होनी थी, वह कुछ समय के लिए राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया। अधिकारियों के सामने भी अजीब स्थिति बन गई—एक तरफ अवैध निर्माणों पर सख्ती के आदेश, दूसरी तरफ प्रभावशाली लोगों की कथित पैरवी की चर्चाएं।
निगम के गलियारों में अब यह मामला “होटल सीलिंग” से ज्यादा “सीलिंग ड्रामा” के नाम से चर्चा में है। कर्मचारी भी दबी जुबान में कह रहे हैं कि अवैध निर्माणों के खिलाफ लड़ाई कभी-कभी बुलडोजर से कम और दबावों से ज्यादा कठिन हो जाती है।
फिलहाल होटल तो सील हो गया, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल जरूर छोड़ दिया है कि अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के दौरान नियम ज्यादा ताकतवर हैं या फिर सिफारिशें?
