नई दिल्ली। देशभर में बढ़ते अवैध निर्माण और नगर निकायों की निष्क्रियता पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि अदालत के आदेशों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि केवल नोटिस जारी कर औपचारिकता निभाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अवैध निर्माण पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के कार्यों पर नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी में अवैध निर्माण की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम से सर्वे कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि जिन नगर निकायों ने पहले दिए गए आदेशों के अनुपालन की रिपोर्ट दाखिल नहीं की है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मालवीय नगर अग्निकांड और अन्य भवन हादसों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासनिक लापरवाही की कीमत आम नागरिकों को अपनी जान और सुरक्षा से चुकानी पड़ रही है। अदालत ने दो टूक कहा कि यदि न्यायालय के आदेशों के बाद भी अधिकारी कार्रवाई नहीं करेंगे, तो आम नागरिक पूरी तरह असहाय हो जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम में 93 प्रतिशत फायर सेफ्टी ऑडिट फेल होने के मामले में नगर निकाय के उपाध्यक्ष को तलब किया है, जबकि लखनऊ नगर निगम आयुक्त को भी कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

इधर, दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-16 में निर्माणाधीन पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना का भी अदालत में उल्लेख हुआ। इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दो छोटे प्लॉटों को मिलाकर भवन का निर्माण किया जा रहा था। घटना के बाद ठेकेदार फरार है और मामले की जांच जारी है।
सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख को अवैध निर्माण पर अंकुश लगाने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
