सफाई कर्मचारियों के नियमितीकरण की 10,578 फाइलें लंबित

एमसीडी ने जोनल अधिकारियों को 15 सितंबर तक लंबित फाइलें भेजने का दिया आदेश, तीन महीने में पूरी करनी होगी प्रक्रिया

नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम में सफाई कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एमसीडी के डेम्स मुख्यालय के 18 अगस्त के कार्यालय आदेश के अनुसार अलग-अलग ब्लॉक वर्षों में सफाई कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़ी 10,578 फाइलें लंबित हैं। निगम ने अब सभी जोनल उपायुक्तों को इन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने और निर्धारित समयसीमा में फाइलें मुख्यालय को उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दिए हैं।

आदेश के मुताबिक ब्लॉक वर्ष 1998-2000 (नॉर्मल) और 2003-2010 (कंपैशनेट ग्राउंड) की लंबित फाइलें 15 सितंबर 2026 तक DEMS मुख्यालय को उपलब्ध करानी होंगी। वहीं 2000-2002 (नॉर्मल) और 2010-2015 (कंपैशनेट ग्राउंड) से संबंधित मामलों को तीन महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।

उत्तर-पूर्व जोन में सबसे ज्यादा पेंडेंसी

जोनवार आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक 1,924 मामले उत्तर-पूर्व जोन में लंबित हैं। इसके बाद पूर्वी जोन में 1,731, बाहरी उत्तर जोन में 1,321, सेंट्रल जोन में 887, पुरानी दिल्ली जोन में 879 और उत्तर जोन में 807 मामले लंबित हैं। वहीं दक्षिण जोन में 469, उत्तर-पश्चिम जोन में 517, दक्षिण-पूर्व जोन में 593, पश्चिम जोन में 620, केंद्रीय उत्तर जोन में 470 और दक्षिण-पश्चिम जोन में 360 मामले लंबित बताए गए हैं।

संसद की समिति के निर्देश के बाद तेजी

एमसीडी ने आदेश में स्पष्ट किया है कि नियमितीकरण की पूरी प्रक्रिया की पूर्णता रिपोर्ट संसद की समिति के समक्ष प्रस्तुत की जानी है। आदेश के अनुसार 4 अगस्त को संसद में हुई बैठक में इस संबंध में निर्देश दिए गए थे। इसके बाद 13 अगस्त को उच्च अधिकारियों की बैठक में भी लंबित मामलों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए।

निगम ने सभी जोनल उपायुक्तों से कहा है कि वे नीति के तहत लंबित मामलों की जांच और प्रक्रिया पूरी कराते हुए संबंधित फाइलें DEMS मुख्यालय को उपलब्ध कराएं। वित्त विभाग को भी नियमितीकरण के लिए जरूरी वाउचर के सत्यापन की कार्रवाई तेज कराने को कहा गया है।

10,578 परिवारों के भविष्य से जुड़ा मामला

सफाई कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़ी हजारों फाइलों का वर्षों से लंबित रहना निगम की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब एमसीडी ने समयसीमा तय कर दी है, लेकिन असली चुनौती यह होगी कि 15 सितंबर तक कितनी फाइलें वास्तव में मुख्यालय पहुंचती हैं और कितने सफाई कर्मचारियों को नियमितीकरण का लाभ मिल पाता है। आदेश में इसे “MOST URGENT” बताते हुए समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।