जमरूदपुर में विरासत स्थलों पर एमसीडी का बुलडोजर, 10 से ज्यादा ट्रक मलबा हटाया
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद तेज हुई कार्रवाई, अवैध गोदाम-पशु बाड़े और तीन लोहे के गेट भी हटाए
दक्षिणी दिल्ली के जमरूदपुर गांव में ऐतिहासिक विरासत स्मारकों पर हुए अतिक्रमण के खिलाफ दिल्ली नगर निगम ने गुरुवार को बड़ा अभियान चलाया। एमसीडी की संयुक्त टीम ने बाहरी पुलिस बल और स्थानीय पुलिस के सहयोग से कई घंटे तक कार्रवाई करते हुए विरासत स्थलों पर किए गए अवैध निर्माण और अतिक्रमण को ध्वस्त किया।
यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में लंबित राजीव सूरी बनाम एएसआई एवं अन्य मामले की पृष्ठभूमि में हुई है। खास बात यह है कि 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने जमरूदपुर के विरासत स्मारकों की बदहाली और अतिक्रमण को लेकर एमसीडी तथा एएसआई पर गंभीर टिप्पणी करते हुए अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जवाब देने के लिए तलब किया था। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को निर्धारित है।

60 से ज्यादा निगमकर्मी उतरे मैदान में
एमसीडी की कार्रवाई में विभिन्न विभागों के 60 से अधिक कर्मचारी लगाए गए। मशीनों और पर्याप्त पुलिस बल की मौजूदगी में विरासत स्मारकों की दीवारों पर किए गए अवैध निर्माण को तोड़ा गया। स्मारक परिसर के भीतर गोदाम के तौर पर इस्तेमाल की जा रही अवैध संरचनाओं और पशुओं को रखने के लिए बनाए गए निर्माणों को भी ध्वस्त किया गया।इसके साथ ही विरासत भवन में प्रवेश को बाधित करने वाले तीन लोहे के गेट भी हटा दिए गए। निर्माण एवं विध्वंस मलबे तथा अन्य कूड़े को हटाने के लिए निगम की सफाई टीमों को मौके पर लगाया गया।
10 से ज्यादा ट्रकों में निकला मलबा
कार्रवाई के दौरान विरासत स्थल से 10 से अधिक ट्रकों में मलबा बाहर निकाला गया। निगम के अनुसार शेष मलबा भी अगले कुछ दिनों में पूरी तरह हटा दिया जाएगा। एमसीडी ने स्पष्ट किया है कि जमरूदपुर समेत शहर के अन्य विरासत स्थलों को अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण से मुक्त कराने का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट में हालिया सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया था कि जमरूदपुर में एमसीडी के अधीन पांच ग्रेड-I विरासत भवन बताए गए हैं, जिनमें से एक का पता तक नहीं चल पाया था। अदालत ने एमसीडी की स्थिति रिपोर्ट और मौके की वास्तविक स्थिति में अंतर को लेकर कड़ी नाराजगी जताई थी।

सवालों के घेरे में रही थी विरासत की सुरक्षा
जमरूदपुर के ऐतिहासिक स्मारकों पर लंबे समय से अतिक्रमण और बदहाली की शिकायतें सामने आती रही हैं। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब एमसीडी ने मौके पर कार्रवाई कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि सरकारी भूमि और ऐतिहासिक विरासत को कब्जे में लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एमसीडी का कहना है कि अभियान का उद्देश्य सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के साथ-साथ ऐतिहासिक स्मारकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आम लोगों के लिए इन स्थलों तक सुगम पहुंच बहाल करना है। निगम ने कहा है कि सार्वजनिक स्थानों और विरासत संपत्तियों को अवरोध एवं अवैध कब्जे से मुक्त रखने के लिए निगरानी और कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
