दिल्ली बेहाल, भाजपा सरकार मालामाल दावों में! बारिश ने खोली ‘विश्वस्तरीय दिल्ली’ की पोल: नाज़िया दानिश

जलभराव से बाढ़ जैसे हालात, सड़कों पर जानलेवा गड्ढे और बीमारियों का बढ़ता प्रकोप—नाज़िया दानिश बोलीं, “जब आज की दिल्ली नहीं संभल रही तो 2047 का सपना किस आधार पर दिखा रही है सरकार?”

नई दिल्ली, 3 सितंबर 2026। राजधानी दिल्ली में मानसून की बारिश ने भाजपा सरकार के ‘बेहतर सड़कों, बेहतर जल निकासी और विश्वस्तरीय दिल्ली’ के तमाम दावों की पोल खोल दी है। बारिश के बाद दिल्ली के कई हिस्सों में जलभराव से बाढ़ जैसे हालात हैं, सड़कें गहरे गड्ढों में तब्दील हैं, ट्रैफिक रेंग रहा है और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बेहाल हो गई है। दूसरी ओर डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया और स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

कांग्रेस नेता नाज़िया दानिश ने भाजपा सरकार पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि “दिल्ली की जनता सड़कों पर गड्ढे, गड्ढों में पानी और अस्पतालों में बीमारियां झेल रही है, जबकि सरकार कागजों पर दिल्ली को विश्वस्तरीय बनाने में जुटी है।”

उन्होंने कहा कि राजधानी में बारिश कोई अप्रत्याशित घटना नहीं है। हर साल मानसून आता है और हर साल सरकार जलभराव से निपटने के बड़े-बड़े दावे करती है। इसके बावजूद पहली तेज बारिश में ही नालों और जल निकासी व्यवस्था की हकीकत सामने आ जाती है। अगर मानसून से पहले तैयारियां पूरी थीं तो बारिश के बाद दिल्ली तालाब में क्यों बदल गई?

सड़कों के गड्ढे बने जान का खतरा

नाज़िया दानिश ने कहा कि दिल्ली की सड़कों की हालत बेहद चिंताजनक है। कई प्रमुख सड़कों पर गहरे गड्ढे हैं, जो बारिश का पानी भर जाने के बाद दिखाई तक नहीं देते। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों के लिए हादसे का खतरा और बढ़ गया है।उन्होंने कहा कि आईटीओ, मथुरा रोड, लक्ष्मी नगर, अरबिंदो मार्ग, एमबी रोड सहित राजधानी के अनेक इलाकों में सड़क, ट्रैफिक और जलभराव की समस्याएं एक साथ दिखाई दे रही हैं। कुछ किलोमीटर का सफर पूरा करने में लोगों को एक-दो घंटे तक लग रहे हैं। एंबुलेंस, स्कूली वाहन और रोजाना काम पर जाने वाले लोगों तक को इस अव्यवस्था की कीमत चुकानी पड़ रही है।

445 हॉटस्पॉट चिन्हित, फिर भी समाधान कहां?

कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि जब सरकार की अपनी एजेंसी पीडब्ल्यूडी ने 445 हॉटस्पॉट चिन्हित किए हैं, तो फिर इन स्थानों पर स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया?

उन्होंने कहा कि सिर्फ गड्ढों की गिनती करने और मरम्मत के आंकड़े जारी करने से दिल्ली की सड़कें सुरक्षित नहीं होंगी। सरकार को आंकड़ों की बाजीगरी छोड़कर सड़क पर उतरना होगा।

नाज़िया दानिश ने कहा कि सरकार द्वारा हजारों गड्ढों की मरम्मत और सड़कों को दुरुस्त करने के दावे किए गए, लेकिन जमीनी स्थिति इन दावों को झुठला रही है। “अगर कागजों पर सड़कें ठीक हो चुकी हैं तो दिल्ली की जनता आज भी उन्हीं गड्ढों से क्यों गुजर रही है?” उन्होंने पूछा।

बीमारियां बढ़ रहीं, सरकार की तैयारी पर सवाल

नाज़िया दानिश ने कहा कि जलभराव सिर्फ ट्रैफिक और सड़क की समस्या नहीं है, बल्कि यह गंभीर स्वास्थ्य संकट को जन्म देता है। जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का कारण बन रहा है और डेंगू, मलेरिया तथा चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। स्वाइन फ्लू को लेकर भी लोगों में चिंता है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि सिर्फ एडवाइजरी और बयान जारी करने के बजाय मोहल्ला स्तर पर फॉगिंग, लार्वा नियंत्रण, सफाई, जल निकासी और स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

‘पहले दिल्ली बचाइए, फिर 2047 का सपना दिखाइए’

नाज़िया दानिश ने भाजपा सरकार के 2047 के मास्टर प्लान पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि “जिस सरकार से वर्तमान दिल्ली की सड़कें, नालियां, ट्रैफिक और बुनियादी स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं संभल रही, वह 2047 की विश्वस्तरीय दिल्ली बनाने का सपना जनता को कैसे बेच सकती है?”

उन्होंने कहा कि दिल्ली को विश्वस्तरीय बनाने के लिए पोस्टर, प्रेस कॉन्फ्रेंस और कागजी योजनाएं नहीं, बल्कि जमीन पर काम चाहिए। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जलभराव वाले इलाकों की स्थायी जल निकासी कब तक होगी, जर्जर सड़कों की मरम्मत कब पूरी होगी और बढ़ती बीमारियों पर नियंत्रण के लिए क्या ठोस कार्ययोजना बनाई गई है।

उन्होंने कहा, “दिल्ली की जनता को घोषणाएं नहीं, सुरक्षित सड़कें चाहिए; भाषण नहीं, जल निकासी चाहिए; आंकड़े नहीं, इलाज चाहिए। भाजपा सरकार अगर इन बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकती तो उसे 2047 के सपने दिखाकर जनता को गुमराह करना बंद करना चाहिए।”