सत्य निकेतन हादसे के बाद एमसीडी का शिकंजा, खतरनाक भवनों पर होगी सीलिंग-ध्वस्तीकरण कार्रवाई

मेयर प्रवेश वाही और आयुक्त संजीव खिरवार ने जोनल उपायुक्तों को दिए सख्त निर्देश, दिल्लीभर में होगा जर्जर व अनधिकृत भवनों का सर्वे

नई दिल्ली, 8 सितंबर। सत्य निकेतन भवन हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने राजधानी में खतरनाक, जर्जर और अनधिकृत भवनों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का फैसला किया है। मेयर प्रवेश वाही और एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार ने सभी जोनल उपायुक्तों को अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे भवनों की पहचान कर जोखिम के आधार पर वर्गीकृत करने तथा जरूरत पड़ने पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण की तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

निगम के मुताबिक राजधानी में असुरक्षित भवनों, अवैध निर्माण और भवनों के दुरुपयोग के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अब कार्रवाई को केवल हादसे के बाद तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि खतरे की पहले पहचान कर निवारक कार्रवाई की जाएगी।

मेयर प्रवेश वाही ने अधिकारियों को अनधिकृत निर्माणों की पहचान कर लागू भवन उपविधियों के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही पीजी आवासों, स्कूलों, होटलों और स्वास्थ्य सुविधाओं का व्यापक निरीक्षण करने को कहा गया है, ताकि इनमें सभी जरूरी स्वीकृतियां, अनुमतियां और दस्तावेज वैध रूप से उपलब्ध हैं या नहीं, इसकी जांच की जा सके।

आयुक्त संजीव खिरवार ने जोनल उपायुक्तों के साथ बैठक कर दिल्लीभर में भवनों का व्यापक सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए। सर्वे में उन भवनों और संरचनाओं को चिन्हित किया जाएगा, जो मानव जीवन और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। इन भवनों को उनकी स्थिति के अनुसार वर्गीकृत किया जाएगा। इनमें तत्काल खतरा पैदा करने वाले भवनों के अलावा ऐसे भवन भी शामिल होंगे, जिन्हें छोटी-बड़ी मरम्मत अथवा संरचनात्मक हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

तत्काल खतरे वाले भवनों पर सीधे कार्रवाई

आयुक्त ने स्पष्ट किया कि जिन भवनों से तत्काल खतरा है, उनके खिलाफ बिना देरी कार्रवाई की जाए। कानून के प्रावधानों के तहत आवश्यक होने पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण किया जाएगा। ऐसे अवैध निर्माणों पर भी कार्रवाई होगी, जिनसे भवन की संरचनात्मक सुरक्षा प्रभावित हो रही है या वहां रहने वाले लोगों तथा आम जनता की जान जोखिम में पड़ रही है।

आयुक्त खिरवार ने अधिकारियों को दो टूक संदेश दिया कि मानव जीवन की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि निगम का रवैया प्रतिक्रियात्मक नहीं बल्कि सक्रिय और निवारक होना चाहिए। प्रत्येक खतरनाक भवन, अनधिकृत निर्माण और ऐसे संरचनात्मक उल्लंघन की पहचान की जाए, जिससे लोगों की जान को खतरा हो सकता है।

उन्होंने विशेष रूप से बच्चों और विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। साथ ही भवनों की स्थिति की नियमित निगरानी और भवन मानदंडों एवं सुरक्षा नियमों के कड़ाई से पालन पर जोर दिया।

निगम ने संबंधित विभागों और क्षेत्रीय अधिकारियों को आपसी समन्वय से कार्रवाई करने तथा जहां भी नियमों का उल्लंघन अथवा असुरक्षित परिस्थितियां सामने आएं, वहां तत्काल और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।