2,200 ‘स्वनाथ’ युवाओं ने भरी नई उड़ान, 18 के बाद भी नहीं छूटेगा हाथ
‘अनाथ से स्वनाथ’ सम्मेलन में बाल अधिकारों पर मंथन, 2,800 से अधिक लोग जुटे; सहायता, रोजगार और स्वास्थ्य केंद्रों की शुरुआत
नई दिल्ली। राजधानी में पहली बार आफ्टर-केयर युवाओं को लेकर आयोजित ‘स्वनाथ सम्मेलन-2026’ में देशभर के बाल अधिकार विशेषज्ञों, सरकारी प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और 2,200 युवाओं ने एक मंच पर आकर नई सामाजिक पहल का संदेश दिया। गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के ईस्ट दिल्ली कैंपस, सूरजमल विहार स्थित कन्वेंशन हॉल में आयोजित सम्मेलन में 2,800 से अधिक लोगों की मौजूदगी रही। सम्मेलन का मूल संदेश रहा—हर बच्चे को स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और स्वावलंबन का अधिकार।
नई उड़ान ट्रस्ट और विश्व मांगलय स्वनाथ परिषद के संयुक्त तत्वावधान में तथा गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय और महिला एवं बाल विकास विभाग, दिल्ली सरकार के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में 18 वर्ष की आयु के बाद आफ्टर-केयर व्यवस्था से बाहर आने वाले युवाओं की शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, कानूनी सहायता, कौशल विकास, मानसिक सहयोग और सामाजिक पुनर्वास पर व्यापक चर्चा हुई।
18 साल के बाद संरक्षण खत्म नहीं, नई जिंदगी की शुरुआत
दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि 18 वर्ष की आयु किसी बच्चे के संरक्षण का अंत नहीं, बल्कि उसके नए जीवन की शुरुआत होनी चाहिए। आफ्टर-केयर युवाओं को बैंकिंग, वित्तीय साक्षरता, उच्च शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, दस्तावेज प्रबंधन, जीवन कौशल और मार्गदर्शन की जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है।
केंद्रीय राज्य मंत्री एवं भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि समाज की जिम्मेदारी केवल बच्चों को संरक्षण देने तक सीमित नहीं हो सकती। प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, अवसर और सही मार्गदर्शन के साथ सम्मानपूर्वक आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।
आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक प्रशांत हरतालकर ने कहा कि बच्चों का भविष्य केवल सरकारी योजनाओं से सुरक्षित नहीं होगा। समाज के सक्षम वर्ग को भी शिक्षा, संस्कार, मार्गदर्शन और आत्मनिर्भरता के लिए आगे आना होगा।
बच्चे की जरूरत बने योजनाओं का केंद्र
महिला एवं बाल विकास विभाग, दिल्ली सरकार की सचिव रश्मि सिंह, आईएएस ने कहा कि बाल संरक्षण व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य केवल तत्काल सुरक्षा देना नहीं, बल्कि बच्चों को शिक्षा, कौशल, मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग देकर आत्मनिर्भर नागरिक बनाना होना चाहिए। उन्होंने आफ्टर-केयर व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि 18 वर्ष के बाद युवाओं को शिक्षा, रोजगार, आवास, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्वास जैसी चुनौतियों से अकेले नहीं जूझना चाहिए।
राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान की अतिरिक्त निदेशक डॉ. संघमित्रा बारिक, आईएएस ने कहा कि हर बच्चे की परिस्थिति और जरूरत अलग होती है। इसलिए योजनाओं का केंद्र सरकारी प्रावधान नहीं, बल्कि बच्चे की वास्तविक जरूरत और उसका सुरक्षित एवं सम्मानजनक भविष्य होना चाहिए।
कानूनी अधिकारों से रोजगार तक तीन सत्रों में मंथन
वरिष्ठ अधिवक्ता बी.के. सिंह की अध्यक्षता में दूसरे सत्र में बाल अधिकार, कानूनी सुरक्षा, स्वास्थ्य, बीमा और आर्थिक सुरक्षा पर चर्चा हुई। उन्होंने आफ्टर-केयर युवाओं के लिए निःशुल्क कानूनी सलाह और मार्गदर्शन की आवश्यकता पर जोर दिया।
दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश व्यास ने कहा कि बच्चों को अपने अधिकारों की जानकारी देकर ही वास्तविक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है। वहीं एलआईसी, उदेयन केयर, एम3एम और अन्य सामाजिक संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधियों ने आर्थिक सुरक्षा, कौशल, रोजगार और निरंतर सामाजिक सहयोग की जरूरत बताई।
तीन केंद्रों से मिलेगा सीधा सहारा
सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि आफ्टर-केयर युवाओं के लिए तीन विशेष केंद्रों—‘स्वनाथ सहायता केंद्र’, ‘स्वनाथ रोजगार केंद्र’ और ‘स्वनाथ स्वास्थ्य केंद्र’—का विधिवत विमोचन एवं उद्घाटन रहा। दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा और गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय की कुलपति पद्मश्री प्रो. डॉ. महेश वर्मा ने इन केंद्रों का उद्घाटन किया।
स्वनाथ सहायता केंद्र सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, दस्तावेज, वित्तीय साक्षरता, कानूनी सहायता और आफ्टर-केयर सेवाओं से जोड़ने का काम करेगा।स्वनाथ रोजगार केंद्र कौशल प्रशिक्षण, करियर परामर्श, रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने पर केंद्रित होगा।स्वनाथ स्वास्थ्य केंद्र स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य और वेलनेस जैसी सेवाओं से युवाओं को जोड़ेगा।
‘विकसित भारत’ के लिए हर बच्चे को आगे बढ़ाना होगा
तीसरे सत्र की अध्यक्षता करते हुए दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि विकसित भारत-2047 का सपना तभी साकार होगा, जब समाज का प्रत्येक बच्चा आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सके। उन्होंने सक्षम परिवारों से जरूरतमंद बच्चों को परिवार, शिक्षा और संस्कार देने के लिए आगे आने की अपील की।
सम्मेलन में स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया, जिसमें दंत, नेत्र और सामान्य स्वास्थ्य जांच की गई। विभिन्न विभागों और संस्थाओं ने प्रदर्शनी स्टॉल लगाकर बाल संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी।
‘यह शुरुआत है, अभियान देशभर तक ले जाएंगे’
नई उड़ान ट्रस्ट के संस्थापक एवं विश्व मंगल्य स्वनाथ परिषद के संयोजक महेंद्र रावत ने कहा कि ‘स्वनाथ सम्मेलन-2026’ किसी अभियान का अंत नहीं, बल्कि नई सामाजिक यात्रा की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि अनाथ एवं देखभाल की आवश्यकता वाले बच्चों को केवल संरक्षण नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल, रोजगार, मार्गदर्शन और सम्मानजनक आत्मनिर्भर जीवन देना लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि जल्द ही इससे भी बड़े स्तर पर देशभर के बाल अधिकार विशेषज्ञों, शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य क्षेत्र, कॉरपोरेट और सामाजिक संगठनों को जोड़कर आफ्टर-केयर युवाओं के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी।सम्मेलन का संदेश साफ रहा—‘अनाथ’ केवल एक परिस्थिति है, पहचान नहीं। पहचान शिक्षा, क्षमता, अधिकार और आत्मनिर्भरता से बनेगी।
