सीलिंग के नाम पर व्यापारियों को सजा क्यों? नाज़िया दानिश ने MCD को घेरा
बिना पर्याप्त नोटिस कार्रवाई पर कांग्रेस का हमला, बोलीं—अवैध निर्माण वर्षों तक किसकी शह पर चलता रहा?
नई दिल्ली। दिल्ली में एमसीडी की ओर से अचानक की गई सीलिंग कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने भाजपा शासित निगम पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता नाज़िया दानिश ने कहा कि बिना पर्याप्त पूर्व सूचना, स्पष्ट दिशा-निर्देश और प्रभावित दुकानदारों को अपनी बात रखने का उचित अवसर दिए सीलिंग करना व्यापारियों और आम जनता के साथ अन्याय है।
नाज़िया दानिश ने कहा कि यदि किसी दुकान, संपत्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई जरूरी थी तो एमसीडी को पहले नोटिस जारी कर दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए थी। संबंधित लोगों को सुनवाई और नियमों के अनुरूप सुधार का अवसर दिए बिना अचानक कार्रवाई करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में पिछले करीब दो दशकों से अवैध निर्माण और अवैध दुकानों का विस्तार होता रहा, लेकिन भाजपा शासित नगर निगम के अधिकारियों और नेताओं ने समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। अब वर्षों की लापरवाही का बोझ दुकानदारों और छोटे व्यापारियों पर डालकर उनकी रोजी-रोटी छीनने की कोशिश की जा रही है।
नाज़िया दानिश ने सवाल उठाया कि अगर निर्माण वास्तव में अवैध था तो इतने वर्षों तक एमसीडी के अधिकारी क्या कर रहे थे? अवैध निर्माण खड़ा होने के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण देने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? उन्होंने कहा कि केवल दुकान या भवन सील कर देने से जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती।
कांग्रेस नेता ने कहा कि अचानक हुई कार्रवाई से बाजारों में अफरा-तफरी का माहौल बना और छोटे दुकानदारों तथा व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन कानून की आड़ में मनमानी और बिना उचित प्रक्रिया के कार्रवाई स्वीकार नहीं की जा सकती।
नाज़िया दानिश ने भाजपा शासित एमसीडी और दिल्ली सरकार के बीच समन्वय की कमी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसका खामियाजा दिल्ली की जनता और व्यापारी वर्ग भुगत रहा है। उन्होंने मांग की कि आज की सीलिंग कार्रवाई की तत्काल समीक्षा की जाए, प्रभावित दुकानदारों की समस्याएं सुनी जाएं और जहां नियमों के तहत संभव हो, उन्हें राहत दी जाए।
उन्होंने कहा कि सीलिंग को राजस्व वसूली या दबाव बनाने का हथियार नहीं, बल्कि नियमों के पालन की अंतिम कार्रवाई के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। साथ ही पिछले वर्षों में हुए अवैध निर्माण की पूरी जांच कर उन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए, जिनकी कथित लापरवाही या संरक्षण में अवैध निर्माण खड़े हुए।
