“हिंदी केवल भाषा नहीं, हमारी सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय अस्मिता की सशक्त अभिव्यक्ति” — हिंदी दिवस पर महापौर ने प्रशासन को जनता की भाषा में जोड़ने पर दिया जोर

हिंदी के सम्मान से जनसेवा तक—एमसीडी में प्रवेश वाही का बड़ा संदेश

नई दिल्ली, 14 सितंबर। हिंदी दिवस के मौके पर दिल्ली नगर निगम में भाषा को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिबद्धता का बड़ा संदेश देते हुए महापौर प्रवेश वाही ने कहा कि हिंदी सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय अस्मिता की सशक्त अभिव्यक्ति है। एमसीडी के हिंदी दिवस एवं राजभाषा सम्मान समारोह में महापौर ने साफ संदेश दिया कि राजभाषा हिंदी का सम्मान महज एक दिन के आयोजन तक सीमित नहीं रह सकता—इसे निगम के रोजमर्रा के कामकाज और जनसेवा का हिस्सा बनाना होगा।

प्रवेश वाही ने कहा कि दिल्ली जैसे महानगर में नगर निगम सीधे करोड़ों नागरिकों के जीवन से जुड़ा हुआ है। ऐसे में प्रशासन और जनता के बीच संवाद जितना सरल और सहज होगा, जनसेवा उतनी ही प्रभावी होगी। उन्होंने निगम अधिकारियों और कर्मचारियों से कार्यालयीन कामकाज, पत्राचार और जनसंचार में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान किया।

हिंदी के साथ सभी भारतीय भाषाओं का सम्मान—वाही का स्पष्ट संदेश

महापौर ने हिंदी के नाम पर भाषाई टकराव की राजनीति से अलग एक व्यापक संदेश देते हुए कहा कि भारत की भाषाई विविधता ही उसकी ताकत है। हिंदी का विकास तभी सार्थक है, जब देश की सभी भारतीय भाषाओं को समान सम्मान और आगे बढ़ने का अवसर मिले।

उन्होंने कहा कि भारत की बहुरंगी सांस्कृतिक विरासत को व्यापक अभिव्यक्ति देने में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका है। यही कारण है कि निगम के कामकाज में हिंदी के प्रयोग को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जनता से सीधे जुड़ने की प्रशासनिक जरूरत के रूप में देखा जाना चाहिए।

जनता की भाषा में प्रशासन—एमसीडी की कार्यशैली पर जोर

हिंदी दिवस समारोह में महापौर का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही रहा कि सरकारी भाषा जनता से दूरी बनाने वाली नहीं, बल्कि जनता को प्रशासन से जोड़ने वाली होनी चाहिए। उन्होंने निगम कर्मियों से हिंदी के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भागीदारी करने और दैनिक कार्यों में इसके इस्तेमाल को बढ़ाने की अपील की।

उप महापौर एवं हिंदी समिति अध्यक्ष डॉ. मोनिका पंत ने भी हिंदी को जन-जन से जुड़ी भाषा बताते हुए प्रशासनिक कार्यों में इसके सहज प्रयोग पर जोर दिया। नेता सदन जय भगवान यादव ने कहा कि हिंदी भावनाओं, संस्कृति और सामाजिक जुड़ाव की भाषा है तथा राजभाषा का सम्मान तभी सार्थक होगा, जब जनसेवा के प्रत्येक स्तर पर इसका प्रयोग बढ़े।

केंद्र से निगम तक हिंदी के विस्तार का संदेश

समारोह में अतिरिक्त आयुक्त डॉ. सतेन्द्र सिंह दुर्सावत ने केंद्रीय गृह मंत्री का संबोधन पढ़कर सुनाया। इसमें भारत की भाषाई बहुलता को देश की शक्ति बताते हुए सभी भारतीय भाषाओं के विकास पर जोर दिया गया।अतिरिक्त आयुक्त बलवान सिंह जगलान ने निगम आयुक्त का संदेश पढ़कर सुनाया, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों से कार्यालयीन कार्यों तथा दैनिक पत्राचार में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान किया गया।

कवियों-साहित्यकारों को सम्मान, राष्ट्रभावना से गूंजा समारोह

समारोह में हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले नंदिनी श्रीवास्तव, सूरज त्रिपाठी, रागिनी झा, योगेश तथा बाल कवयित्री सानवी जैन सहित साहित्यिक प्रतिभाओं और कवियों को सम्मानित किया गया।

कवि सम्मेलन में कवियों ने हिंदी की गरिमा, भारतीय संस्कृति, सामाजिक सरोकारों और राष्ट्रभावना से जुड़ी रचनाएं प्रस्तुत कर माहौल को भावनात्मक और राष्ट्रवादी रंग दिया।

कार्यक्रम में उप महापौर डॉ. मोनिका पंत, नेता सदन जय भगवान यादव, हिंदी समिति की उपाध्यक्ष मनीषा सिंह, पार्षद गुलाब सिंह, राम प्रसाद गहलोत, मनीषा, ऋतु गोयल और नीता बिष्ट सहित निगम के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।