75 इलेक्ट्रिक वाहन बेकार, अब 55 ड्राइवरों पर भी संकट! MCD में करोड़ों की परियोजना पर उठे सवाल

दिल्ली नगर निगम (MCD) में वर्षों से बेकार खड़े 75 इलेक्ट्रिक वाहनों का मामला एक बार फिर चर्चा में है। आरोप है कि वर्ष 2017-18 में करोड़ों रुपये खर्च कर खरीदे अथवा पट्टे पर लिए गए ये वाहन आज तक नियमित रूप से जनता की सेवा में इस्तेमाल नहीं किए गए। इसी बीच अब इन वाहनों से जुड़े लगभग 55 ड्राइवरों के भविष्य पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार, नगर निगम मुख्यालय सिविक सेंटर की बी-2 और बी-3 पार्किंग में खड़े इन इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग न होने के कारण ड्राइवरों की सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। आशंका जताई जा रही है कि निगम 55 ड्राइवरों की सेवाएं समाप्त कर सकता है, जिससे उनके सामने रोजगार और परिवार के पालन-पोषण का संकट खड़ा हो सकता है।

विरोधी पक्ष का आरोप है कि एक ओर सरकार इलेक्ट्रिक वाहन नीति का व्यापक प्रचार कर रही है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम के पास मौजूद इलेक्ट्रिक वाहन वर्षों से बेकार पड़े हैं। उनका कहना है कि यदि इन वाहनों का समय पर उपयोग किया जाता, तो न केवल सरकारी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होता बल्कि दर्जनों ड्राइवरों की नौकरियां भी खतरे में नहीं पड़तीं।

आरोप यह भी है कि इस मामले पर कई बार सवाल उठने के बावजूद केवल जांच का आश्वासन दिया गया, लेकिन अब तक न जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक हुए और न ही वाहनों के संचालन की स्पष्ट योजना सामने आई।

अब यह मामला केवल करोड़ों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग का नहीं, बल्कि उन 55 ड्राइवरों के रोजगार से भी जुड़ गया है, जिनके सामने आजीविका का संकट खड़ा होने की आशंका है।