गोवंश के नाम पर राजनीति, गोशालाओं के नाम पर सन्नाटा!
मुख्यमंत्री के आदेश को एक साल में भी नहीं मिली जमीन—नाज़िया दानिश का भाजपा सरकार पर हमला, बोलीं- ‘सड़कों पर बेसहारा गोवंश, फाइलों में बंद सरकारी वादे’
नई दिल्ली। दिल्ली में गोवंश के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें और भावनात्मक राजनीति करने वाली भाजपा सरकार की कथित कार्यप्रणाली पर अब कांग्रेस ने सीधा हमला बोला है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जुलाई 2025 में हर जिले में एक गोशाला बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी एक नई गोशाला जमीन पर नहीं उतर सकी। कांग्रेस नेत्री एवं एमसीडी में कांग्रेस दल की नेता नाज़िया दानिश ने इसे सरकार की गंभीर प्रशासनिक विफलता करार देते हुए कहा कि भाजपा के लिए गोवंश सिर्फ भाषणों और राजनीति का मुद्दा है, जमीन पर व्यवस्था बनाने की बारी आती है तो सरकार की फाइलें गायब हो जाती हैं।
‘आदेश मुख्यमंत्री का, चलेगी अफसरों की?’
नाज़िया दानिश ने सवाल दागा कि जब मुख्यमंत्री ने एक साल पहले हर जिले में गोशाला बनाने का निर्देश दिया था तो अब तक एक भी गोशाला क्यों नहीं बनी? क्या मुख्यमंत्री के आदेश पर अफसर अमल नहीं कर रहे या सरकार ने खुद अपने आदेश को ही भुला दिया?
उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता यह जानना चाहती है कि आखिर वह कौन-सी मजबूरी है जिसके कारण सरकार एक साल में गोशाला के लिए जमीन तक चिन्हित नहीं कर पाई। सरकार के पास उद्घाटन और प्रचार के लिए समय है, लेकिन बेसहारा गोवंश के लिए स्थायी व्यवस्था करने के लिए समय नहीं है।
चार गोशालाओं पर हजारों गोवंश का बोझ
दिल्ली में महज चार गोशालाओं के भरोसे व्यवस्था चल रही है। इनमें से दो गोशालाएं क्षमता से बाहर पहुंच चुकी हैं। सुल्तानपुर डबास में 7,848 की क्षमता के मुकाबले करीब 8,200 तथा हरेवली में 3,270 की क्षमता के मुकाबले करीब 4,214 गोवंशी मौजूद हैं।
सुरहेड़ा में 5,232 की क्षमता के मुकाबले करीब 5,100 गोवंशी हैं, जबकि रेवला खानपुर में 3,488 की क्षमता के मुकाबले करीब 2,700 गोवंशी रखे गए हैं। यानी दो गोशालाएं ओवरलोड हैं और बाकी दो में भी जगह तेजी से खत्म हो रही है।
नाज़िया ने कहा कि जब सरकार को यह आंकड़े पता हैं तो फिर नई गोशालाओं के निर्माण में इतनी सुस्ती क्यों? क्या सरकार किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रही है?
दूध निकाला और गाय सड़क पर—कौन रोक रहा है डेयरी माफिया को?
कांग्रेस नेत्री ने दिल्ली के रिहायशी इलाकों में चल रही कथित अवैध डेरियों पर भी निगम और पशुपालन विभाग को घेरा। उन्होंने कहा कि कई डेयरी संचालक दूध निकालने के बाद गायों को सड़कों पर छोड़ देते हैं। यही बेसहारा पशु यातायात के बीच घूमते हैं और दुर्घटनाओं का खतरा पैदा करते हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अवैध डेरियां नियमों का उल्लंघन कर रही हैं तो उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? सिर्फ एफआईआर दर्ज करके खानापूर्ति क्यों की जा रही है?
‘गोवंश पकड़ने की कार्रवाई ठप, क्योंकि रखने की जगह नहीं!’
नाज़िया दानिश ने कहा कि स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि नई पकड़ी जाने वाली गायों को रखने के लिए पर्याप्त जगह तक उपलब्ध नहीं है। पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली से पकड़े गए गोवंश को 40-50 किलोमीटर दूर गोशालाओं तक ले जाना पड़ता है।उन्होंने कहा कि दिल्लीभर से रोजाना बड़ी संख्या में शिकायतें आ रही हैं, लेकिन व्यवस्था के नाम पर सरकार के पास सिर्फ वही पुरानी चार गोशालाएं हैं।
‘भाजपा बताए—गोवंश चाहिए राजनीति के लिए या संरक्षण के लिए?’
नाज़िया दानिश ने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि गोवंश के नाम पर वोट मांगना आसान है, लेकिन उसके संरक्षण के लिए जमीन, गोशाला, चारा और ठोस व्यवस्था करना असली परीक्षा है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार तत्काल प्रत्येक जिले में गोशाला के लिए जमीन चिन्हित करे, निर्माण की समयसीमा सार्वजनिक करे, अवैध डेरियों पर कार्रवाई करे और सड़कों पर घूम रहे बेसहारा गोवंश के लिए स्थायी व्यवस्था बनाए।
नाज़िया ने कहा कि दिल्ली की जनता अब भाषण नहीं, हिसाब चाहती है—एक साल पहले किया गया गोशाला निर्माण का वादा आखिर आज तक फाइलों में क्यों पड़ा है?
