सत्य निकेतन में इमारत ढही, अंकुश नारंग ने भाजपा-MCD को घेरा
‘दिल्ली को मौत का अखाड़ा बना दिया’—MCD की खतरनाक इमारतों की सूची पर उठाए सवाल, उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के साउथ जोन स्थित वसंत विहार के मोती बाग-सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिरने की घटना ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में कई लोगों और करीब 30 से 40 बच्चों के मलबे में दबे होने की खबर से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। राहत एवं बचाव एजेंसियां मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने में जुटी हैं।
हादसे को लेकर MCD नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने भाजपा सरकार और भाजपा शासित दिल्ली नगर निगम पर सीधा हमला बोला है। नारंग ने आरोप लगाया कि दिल्ली में लगातार हादसे हो रहे हैं, लेकिन भाजपा शासित MCD की नींद नहीं खुल रही है।
‘खतरनाक इमारतों की सूची सिर्फ खानापूर्ति’
अंकुश नारंग ने सवाल उठाया कि MCD ने खतरनाक इमारतों की सूची जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली, लेकिन यदि ऐसी इमारतों पर समय रहते कार्रवाई की जाती तो लोगों की जान आज खतरे में नहीं पड़ती।
उन्होंने कहा कि खतरनाक घोषित इमारतों की पहचान के बाद उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या निगम अधिकारियों ने मौके पर जाकर स्थिति की जांच की थी? अगर जांच हुई थी तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
‘जिम्मेदारी तय करे भाजपा सरकार’
नारंग ने मांग की कि सत्य निकेतन हादसे की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य दोषियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि हादसे के बाद केवल राहत-बचाव तक मामला सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह भी जांच होनी चाहिए कि इमारत की स्थिति के बारे में MCD को पहले से जानकारी थी या नहीं और यदि थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
बचाव अभियान पर टिकी निगाहें
हादसे के बाद दमकल विभाग, पुलिस और राहत-बचाव दलों ने मोर्चा संभाल लिया है। मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक कुछ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। घटना में बड़ी संख्या में बच्चों के दबे होने की सूचना ने चिंता और बढ़ा दी है।
सत्य निकेतन जैसे घनी आबादी वाले इलाके में पांच मंजिला इमारत का इस तरह ढहना निर्माण सुरक्षा, भवन निरीक्षण और निगम की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है।
