सत्य निकेतन में मौत का बुलडोजर: हादसे से पहले MCD कहां सो रही थी?
नोटिस और कार्रवाई के बिना अवैध PG कैसे चलता रहा? सात मौतों के बाद पांच अफसर निलंबित, अब सवाल—सिर्फ अधिकारियों पर गाज क्यों, राजनीतिक जवाबदेही कब तय होगी?
नई दिल्ली। सत्य निकेतन में PG इमारत ढहने से हुई मौतों ने दिल्ली की बिल्डिंग सेफ्टी व्यवस्था और MCD की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद पांच MCD अधिकारियों का निलंबन भले ही कार्रवाई की शुरुआत हो, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर इमारत नियमों के खिलाफ या असुरक्षित थी तो हादसे से पहले निगम का तंत्र कहां था?
छात्रों से भरे इलाके में PG और हॉस्टल जैसी व्यावसायिक गतिविधियां चलती रहीं और कथित अवैध निर्माण पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई—यह जांच का सबसे बड़ा बिंदु होना चाहिए।
हादसे के बाद कार्रवाई आसान है, लेकिन हादसा रोकना किसकी जिम्मेदारी थी? MCD के अधिकारी क्षेत्र में भवनों की निगरानी, नियमों के उल्लंघन और खतरनाक निर्माण पर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार हैं। ऐसे में अब केवल निलंबन से मामला खत्म नहीं होना चाहिए। यह भी सामने आना चाहिए कि संबंधित इमारत के खिलाफ पहले कोई शिकायत, निरीक्षण, नोटिस या कार्रवाई हुई थी या नहीं।
‘करप्शन मॉडल’ के आरोपों की भी हो निष्पक्ष जांच
विपक्ष द्वारा MCD और BJP पर संरक्षण व भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रखने के बजाय पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी, ठेकेदार, बिल्डर या राजनीतिक व्यक्ति की मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई हो।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या जिम्मेदारी सिर्फ उन पांच अधिकारियों तक सीमित है, या उस पूरी व्यवस्था की भी जवाबदेही तय होगी जिसने कथित रूप से खतरे को हादसे तक पहुंचने दिया?
सात मौतों के बाद भी अगर जवाब सिर्फ ‘निलंबन’ है तो असली दोषी कौन?
सत्य निकेतन की घटना ने छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। अब सरकार और MCD को बताना होगा कि राजधानी में चल रहे PG, हॉस्टल और बहुमंजिला भवनों की सुरक्षा जांच कितनी गंभीरता से हो रही है।
मौत के बाद मुआवजा और निलंबन नहीं—हादसे से पहले कार्रवाई न करने वालों की जवाबदेही चाहिए।
