प्लास्टिक रीसाइक्लिंग को गुणवत्ता व वैश्विक मानकों से जोड़ना होगा: तेजवीर सिंह
भारत मंडपम में जीसीपीआरएस-2026 का शुभारंभ
नई दिल्ली। भारत मंडपम के हॉल संख्या-6 में तीसरे ग्लोबल कॉन्क्लेव ऑन प्लास्टिक रीसाइक्लिंग एंड सस्टेनेबिलिटी (जीसीपीआरएस-2026) का भव्य शुभारंभ हुआ। ऑल इंडिया प्लास्टिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एआईपीएमए) द्वारा आयोजित इस चार दिवसीय (2-5 जुलाई, 2026)अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एवं प्रदर्शनी में देश-विदेश के उद्योगपति, नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, तकनीकी विशेषज्ञ तथा रीसाइक्लिंग क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्घाटन भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग के सचिव तेजवीर सिंह ने किया।

मुख्य अतिथि तेजवीर सिंह ने कहा कि आज प्लास्टिक आधुनिक जीवन की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है, लेकिन इसके साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व के अग्रणी प्लास्टिक रीसाइक्लिंग देशों में है, किंतु अब केवल मात्रा नहीं बल्कि उच्च गुणवत्ता, वैल्यू एडिशन और उन्नत रीसाइक्लिंग तकनीकों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने केमिकल रीसाइक्लिंग, डिज़ाइन फॉर रीसाइक्लिंग, सर्कुलर इकोनॉमी, मोनो-मटेरियल पैकेजिंग तथा वैश्विक मानकों के अनुरूप उद्योग को विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने उद्योग जगत से अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाने तथा सरकारी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने का आह्वान किया। साथ ही अनौपचारिक कचरा संग्राहकों को औपचारिक व्यवस्था से जोड़ने और सरकार-उद्योग-अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता भी बताई।
एआईपीएमए के गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन अरविंद मेहता ने कहा कि जीसीपीआरएस का तीसरा संस्करण प्लास्टिक रीसाइक्लिंग उद्योग के तेजी से संगठित होते स्वरूप का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस बार 12 देशों के 250 से अधिक प्रदर्शक भाग ले रहे हैं। उनका कहना था कि एआईपीएमए उद्योग की तकनीकी कमियों को दूर करने, कौशल विकास, रोजगार सृजन और प्लास्टिक उत्पादों के निर्यात को आगामी वर्षों में कई गुना बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने जीएसटी से उद्योग के औपचारिकीकरण की सराहना करते हुए सीपीसीबी पोर्टल और ईपीआर अनुपालन से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं के समाधान की भी मांग की।
इस सम्मेलन को सफल बनाने में हितेन भेडा, सिद्धार्थ शाह कैलाश बी मुरारका, हरेन सांघवी, चंद्रकांत तुरखिया, अनिल रेड्डी वेनाम, विपीन देसाई, मयूर के शाह, सुनील मोंगा, वाई वी रमण, अशोक अग्रवाल, मनोज आर शाह की महती भूमिका रही।
एआईपीएमए के अध्यक्ष सुनील शाह ने कहा कि यह आयोजन प्लास्टिक रीसाइक्लिंग उद्योग को सशक्त बनाने और सतत विकास के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में संस्था की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने सरकार के निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उद्योग, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय विकास के बीच संतुलन स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रभ दास ने अपने संबोधन में कहा कि प्लास्टिक उद्योग के भविष्य की मजबूती नवाचार, तकनीकी उन्नयन और सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों को अपनाने में निहित है। उन्होंने उद्योग और सरकार के बीच साझेदारी को टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल विकास का सबसे प्रभावी माध्यम बताया तथा रीसाइक्लिंग आधारित समाधान को भविष्य की औद्योगिक आवश्यकता बताया।
ऑल इंडिया प्लास्टिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एआईपीएमए) द्वारा अगले वर्ष चौथा ग्लोबल कॉन्क्लेव ऑन प्लास्टिक रीसाइक्लिंग एंड सस्टेनेबिलिटी (जीसीपीआरएस-2027) 1 -4 जुलाई, 2027 तक आयोजित किया जाएगा।
