पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने की दिशा में बड़ा कदम, प्लास्टइंडिया फाउंडेशन ने दिल्ली में खोला क्षेत्रीय कार्यालय
नई दिल्ली। भारतीय प्लास्टिक उद्योग की शीर्ष संस्था प्लास्टइंडिया फाउंडेशन ने राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में अपने क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया है। इस पहल का उद्देश्य उद्योग, सरकार और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर प्लास्टिक उद्योग को अधिक टिकाऊ, नवाचार आधारित और भविष्य के लिए तैयार बनाना है।
फाउंडेशन के अध्यक्ष रवीश कामथ के नेतृत्व में स्थापित यह कार्यालय नीतिगत पैरवी, उद्योग का प्रतिनिधित्व, हितधारकों के साथ संवाद और सरकार, शैक्षणिक संस्थानों तथा उद्योग संगठनों के साथ रणनीतिक सहयोग का प्रमुख केंद्र होगा। इसके माध्यम से नवाचार, कौशल विकास, एमएसएमई सहयोग, उद्योग-अकादमिक साझेदारी और क्षमता निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा।
नई दिल्ली में पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ कार्यालय का उद्घाटन फाउंडेशन के उपाध्यक्ष डॉ. राजू देसाई और मानद कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र गांधी ने किया। यह कार्यालय पूरे देश के प्लास्टिक उद्योग के लिए नीतिगत सहयोग, पर्यावरणीय चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान और स्थिरता आधारित पहलों को गति देगा। साथ ही दिल्ली-एनसीआर की विशेष चुनौतियों पर भी फोकस करेगा।
प्लास्टइंडिया फाउंडेशन अपने सात संस्थापक और दो घटक संघों के माध्यम से संपूर्ण भारतीय प्लास्टिक उद्योग का प्रतिनिधित्व करता है। संस्था प्रोसेसर, कच्चा माल निर्माता, मशीनरी निर्माता और तैयार प्लास्टिक उत्पाद निर्माताओं को एक साझा मंच पर लाकर तकनीकी उन्नयन, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और उद्योग विकास को बढ़ावा देती है।
फाउंडेशन प्लास्टिक पुनर्चक्रण, चक्रीय अर्थव्यवस्था, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। वहीं प्लास्टइंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (PIU) के माध्यम से उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित और दक्ष पेशेवर तैयार करने की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है।
फाउंडेशन को सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सिपेट) और प्लास्टिक्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (प्लेक्सकॉन्सिल) जैसी संस्थाओं का सहयोग प्राप्त है, जिससे शिक्षा, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, निर्यात संवर्धन और नीतिगत सहयोग के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी। यह पहल ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में भारतीय प्लास्टिक उद्योग को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
