डेंगू के डेनवी-2 स्ट्रेन के बीच MCD की सुस्ती से बढ़ा मच्छरों का खतरा

दवा छिड़काव में 61% और घर-घर जांच में 8.3% की गिरावट, नाज़िया दानिश ने भाजपा शासित निगम पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। राजधानी में डेंगू के डेनवी-2 स्ट्रेन को लेकर चिंता बढ़ रही है, वहीं मच्छर नियंत्रण अभियान में दिल्ली नगर निगम की कथित सुस्ती पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेत्री नाज़िया दानिश ने निगम के आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि डेंगू के संवेदनशील मौसम में मच्छररोधी दवा के छिड़काव और घर-घर जांच दोनों की रफ्तार पिछले वर्ष के मुकाबले कम हो गई है। उन्होंने कहा कि निगरानी और रोकथाम व्यवस्था कमजोर हुई तो इसका सीधा खामियाजा दिल्ली की जनता को भुगतना पड़ सकता है।

निगम के जन स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 8 अगस्त 2026 तक महज 2,75,767 घरों में मच्छररोधी दवा का छिड़काव किया गया। इसके मुकाबले 1 जनवरी से 9 अगस्त 2025 तक 7,03,793 घरों में दवा का छिड़काव हुआ था। यानी इस वर्ष करीब 4.28 लाख कम घरों तक दवा पहुंची और छिड़काव में लगभग 61 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।

घर-घर जांच की रफ्तार भी घटी

मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान के लिए DBC कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले निरीक्षण में भी गिरावट सामने आई है। इस वर्ष अब तक 2,32,08,873 घरों और अन्य संपत्तियों का निरीक्षण किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 2,53,19,526 निरीक्षण किए गए थे। यानी करीब 21.11 लाख कम निरीक्षण हुए और जांच में लगभग 8.3 प्रतिशत की कमी आई।

जांच कम हुई तो लार्वा मिलने के आंकड़े भी घटे

निगम के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में अब तक 82,870 घरों में मच्छरों का प्रजनन पाया गया, जबकि 2025 में यह संख्या 1,14,451 थी। यानी लार्वा मिलने के मामलों में करीब 27 प्रतिशत की कमी दिखाई दे रही है।हालांकि, कांग्रेस ने इस आंकड़े की व्याख्या पर सवाल उठाया है। नाज़िया दानिश का कहना है कि जब पिछले वर्ष के मुकाबले घर-घर निरीक्षण ही कम हुए हैं तो लार्वा मिलने के मामलों में कमी को मच्छरों के खतरे में वास्तविक कमी कैसे माना जा सकता है। कम जांच का अर्थ यह भी हो सकता है कि कई प्रजनन स्थलों तक निगम की टीमें पहुंच ही नहीं पाईं।

नाज़िया दानिश का सवाल—कम छिड़काव और कम जांच क्यों?

नाज़िया दानिश ने कहा कि डेंगू के संवेदनशील मौसम में निगम को निगरानी और मच्छररोधी कार्रवाई बढ़ानी चाहिए थी, लेकिन आंकड़े इसके उलट तस्वीर दिखा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि पिछले वर्ष की तुलना में लाखों कम घरों में दवा का छिड़काव क्यों हुआ और करोड़ों निरीक्षणों के बावजूद इस वर्ष जांच की रफ्तार क्यों घटी? उन्होंने निगम प्रशासन से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि डेनवी-2 स्ट्रेन के बढ़ते खतरे के बीच मच्छर नियंत्रण के लिए क्या विशेष कार्ययोजना लागू की गई है और कम छिड़काव तथा कम निरीक्षण की भरपाई कैसे की जा रही है।

कांग्रेस नेत्री ने कहा कि मच्छर नियंत्रण केवल कागजी आंकड़ों का विषय नहीं है, बल्कि यह दिल्लीवासियों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा मामला है। निगम को आंकड़ों की बाजीगरी के बजाय जमीन पर फॉगिंग, दवा छिड़काव, लार्वा जांच और प्रजनन स्थलों के निस्तारण की रफ्तार बढ़ानी चाहिए।