पक्के सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी पर उठे सवाल, स्थायी समिति में कार्रवाई की मांग

नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की बैठक में गुरुवार को सफाई व्यवस्था के साथ-साथ उन स्थायी सफाई कर्मचारियों की कार्यप्रणाली का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठा, जो कथित तौर पर नियमित रूप से ड्यूटी नहीं करते, लेकिन वेतन लगातार प्राप्त कर रहे हैं। पार्षदों ने ऐसे कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

बैठक में पार्षदों ने आरोप लगाया कि कई जगह स्थायी सफाई कर्मचारियों के ड्यूटी से गायब रहने का खामियाजा संविदा और कच्चे कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। आरोप है कि जिन कर्मचारियों पर नियमित सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी है, उनमें से कुछ ड्यूटी के दौरान मौके पर मौजूद नहीं रहते, जबकि काम का दबाव कच्चे कर्मचारियों पर डाल दिया जाता है।

पार्षदों ने कहा कि निगम में किसी भी कर्मचारी को बिना काम किए वेतन लेने की छूट नहीं दी जा सकती। ऐसे कर्मचारियों की उपस्थिति, तैनाती और वास्तविक कार्य की जांच कराई जानी चाहिए। बैठक में यह भी कहा गया कि ड्यूटी के समय निर्धारित वर्दी और कार्य संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

कच्चे कर्मचारियों के शोषण का आरोप

पार्षदों का कहना था कि स्थायी कर्मचारियों की गैरहाजिरी का सीधा असर कच्चे कर्मचारियों पर पड़ता है। उन्हें अतिरिक्त काम करना पड़ता है और कई बार स्थायी कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ती है। ऐसे में निगम प्रशासन को उपस्थिति और कार्य निष्पादन की निगरानी के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू करनी चाहिए।

बैठक में मांग उठी कि निगम स्तर पर औचक निरीक्षण कर यह पता लगाया जाए कि कौन कर्मचारी वास्तव में फील्ड में ड्यूटी कर रहा है और कौन केवल कागजों में उपस्थित दर्ज है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाए।

पार्षदों ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई किसी वर्ग विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि बिना काम किए वेतन लेने की प्रवृत्ति के खिलाफ होनी चाहिए। साथ ही मेहनत से काम करने वाले स्थायी और संविदा दोनों तरह के कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए।