नई दिल्ली। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व और उनकी सरकार की नीतियों का मूल्यांकन केवल चुनिंदा राजनीतिक घटनाओं या आलोचनात्मक नजरिए से नहीं, बल्कि शासन, प्रशासन, अर्थव्यवस्था, संस्थागत प्रदर्शन और विदेश नीति के व्यापक संदर्भ में किया जाना चाहिए। भारत-नेपाल संबंधों के विशेषज्ञ राजू स्वामी का मानना है कि शाह सरकार की कमजोरियों पर सवाल उठाना लोकतंत्र की आवश्यकता है, लेकिन उसके सकारात्मक प्रयासों और संभावित उपलब्धियों को भी निष्पक्षता से देखना जरूरी है।

भारत के साथ संवाद को लेकर सकारात्मक संकेत
राजू स्वामी के अनुसार प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की भारत के साथ हाल की कूटनीतिक गतिविधियां इस बात का संकेत देती हैं कि नेपाल की नई सरकार भारत के साथ संबंधों को नजरअंदाज नहीं कर रही है। शाह ने नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव के साथ द्विपक्षीय संबंधों, विकास साझेदारी और सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। वहीं भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की प्रधानमंत्री शाह से मुलाकात में नेपाल-भारत रक्षा सहयोग सहित विभिन्न मुद्दों पर बातचीत हुई।

इन मुलाकातों को दोनों देशों के बीच नियमित और रचनात्मक कूटनीतिक संवाद के तौर पर देखा जा सकता है। राजू स्वामी का कहना है कि नेपाल की नई नेतृत्व व्यवस्था को भारत से दूरी के नजरिए से देखने से पहले इन सार्वजनिक और प्रत्यक्ष कूटनीतिक संपर्कों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
भारत के प्रति शाह का संदेश भी महत्वपूर्ण
भारत के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की जनता को शुभकामनाएं दीं तथा नेपाल-भारत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जन-जन के संबंधों के महत्व को रेखांकित किया। इसे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों की निरंतरता और महत्व को स्वीकार करने वाले संदेश के तौर पर देखा जा सकता है।

मुस्तांग और पर्यटन में भी छिपी है बड़ी संभावना
प्रधानमंत्री शाह की मुस्तांग यात्रा को भी केवल व्यक्तिगत या सामान्य यात्रा के रूप में देखने के बजाय उसके पर्यटन और सांस्कृतिक महत्व को समझने की जरूरत है। वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुक्तिनाथ यात्रा ने इस क्षेत्र को भारत सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
मुस्तांग क्षेत्र का बॉलीवुड से भी पुराना संबंध रहा है। अमिताभ बच्चन की चर्चित फिल्म ‘खुदा गवाह’ की शूटिंग से जुड़े स्थानों को पर्यटन से जोड़कर यहां फिल्म पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटन और हिमालयी पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। ऐसे प्रयास नेपाल के पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा दे सकते हैं।हालांकि, राजू स्वामी का कहना है कि ऐसे मामलों में तथ्य और राजनीतिक व्याख्या के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। किसी व्यक्ति के निर्णय को तुरंत राजनीतिक अर्थ देने के बजाय उसके संभावित सकारात्मक प्रभावों का भी निष्पक्ष मूल्यांकन होना चाहिए।
पहले घरेलू व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
राजू स्वामी के मुताबिक प्रधानमंत्री शाह फिलहाल नेपाल की राजनीतिक, प्रशासनिक और आर्थिक बुनियाद को मजबूत करने पर अधिक ध्यान देते दिखाई दे रहे हैं। किसी भी देश के लिए मजबूत संस्थान, प्रभावी प्रशासन और स्थिर आर्थिक आधार प्रभावी विदेश नीति के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
नेपाल के लिए भारत के साथ संबंध विशेष महत्व रखते हैं। दोनों देशों के बीच खुली सीमा, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक रिश्ते, व्यापार, पारगमन, ऊर्जा, पर्यटन और व्यापक जन-जन के संबंध हैं। इसलिए नेपाल-भारत संबंधों को केवल सरकार से सरकार के रिश्ते तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता।

आपसी सम्मान से बन सकता है नया अध्याय
राजू स्वामी का मानना है कि यदि नेपाल का नया नेतृत्व भारत के साथ संबंधों को आपसी सम्मान, समानता, विश्वास और व्यावहारिक सहयोग के आधार पर आगे बढ़ाता है, तो दोनों देशों के रिश्तों में एक नया आयाम जुड़ सकता है।
ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, पर्यटन, व्यापार, सांस्कृतिक सहयोग और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं। इससे दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों को और अधिक बहुआयामी बनाया जा सकता है।
आलोचना जरूरी, लेकिन तथ्य आधारित हो
राजू स्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री शाह और उनकी सरकार की आलोचना लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाए जाने चाहिए, लेकिन आलोचना तथ्यों, प्रमाण और पूरे संदर्भ पर आधारित होनी चाहिए। किसी नई सरकार के कुछ महीनों के प्रदर्शन के आधार पर उसकी पूरी राजनीतिक यात्रा को ‘उत्थान और पतन’ के रूप में प्रस्तुत करना जटिल राजनीतिक परिस्थितियों को अत्यधिक सरल बना सकता है।
नेपाल इस समय पीढ़ीगत बदलाव, राजनीतिक पुनर्गठन और नई राजनीतिक शक्तियों के उभार के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में नई सरकार के सामने जनता की अपेक्षाएं भी बड़ी हैं और चुनौतियां भी।
नेपाल-भारत रिश्तों में नए दौर की संभावना
राजू स्वामी के अनुसार प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व का निष्पक्ष और तथ्यपरक मूल्यांकन जरूरी है। वस्तुनिष्ठ आकलन का अर्थ केवल कमियां तलाशना नहीं, बल्कि सकारात्मक पहलों, संभावित उपलब्धियों और दीर्घकालिक अवसरों को भी पहचानना है।
नेपाल-भारत संबंध इतिहास, संस्कृति, धर्म, भूगोल, व्यापार और जन-जन के रिश्तों की मजबूत नींव पर आधारित हैं। यदि नेपाल अपनी घरेलू संस्थागत और आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करते हुए भारत के साथ विश्वास, पारस्परिक सम्मान और व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाता है, तो प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में दोनों देशों के संबंध एक नए और अधिक रचनात्मक चरण में प्रवेश कर सकते हैं।
