CBI के कब्जे में वेद प्रकाश की सेलरी स्लिप, अनिल खत्री की सर्विस फाइल भी जांच के घेरे में; कथित फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी के आरोप ने बढ़ाई हलचल

नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम में भ्रष्टाचार के मामले की जांच अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंचती दिख रही है, जहां सेलरी स्लिप और सर्विस फाइल कई छिपे राज खोल सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने एमसीडी मुख्यालय से आरोपी वेद प्रकाश की सेलरी स्लिप और अन्य संबंधित दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं, जबकि दूसरे आरोपी अनिल खत्री की सर्विस फाइल भी जांच एजेंसी द्वारा जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।

मामला सिर्फ कथित रिश्वतखोरी तक सीमित नहीं रहने के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक के बारे में जांच एजेंसी इस पहलू को भी खंगाल रही है कि उसने किसी दूसरे व्यक्ति के नाम और दस्तावेजों के आधार पर एमसीडी में नौकरी हासिल की थी या नहीं। यदि जांच में यह बात प्रमाणित होती है तो सवाल सीधे नियुक्ति प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन की पूरी व्यवस्था पर उठेंगे।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि कर्मचारी के दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी थी, तो नियुक्ति के समय उनका सत्यापन किसने किया? सर्विस के दौरान रिकॉर्ड की जांच क्यों नहीं हुई? संबंधित फाइलें किन-किन अधिकारियों के स्तर से होकर गुजरीं? और अगर दस्तावेजों में कोई विसंगति थी तो वह इतने लंबे समय तक पकड़ में क्यों नहीं आई?यही वजह है कि अब सीबीआई की नजर केवल आरोपी कर्मचारियों पर नहीं, बल्कि उनके नियुक्ति रिकॉर्ड और सर्विस हिस्ट्री पर भी टिकती दिखाई दे रही है।

मामले में केंद्रीय स्थापना विभाग यानी CED से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। जांच का एक अहम पहलू यह हो सकता है कि संबंधित कर्मचारी के नियुक्ति दस्तावेजों, पहचान, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और सर्विस रिकॉर्ड का सत्यापन किस स्तर पर किया गया था। यदि किसी कर्मचारी ने वास्तव में दूसरे व्यक्ति के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था और वह लंबे समय तक निगम में सेवा करता रहा, तो यह अकेले कर्मचारी का मामला नहीं होगा—बल्कि यह सवाल भी उठेगा कि सिस्टम की निगरानी में इतनी बड़ी कथित चूक कैसे हुई।

सीबीआई की कार्रवाई के बाद अब एमसीडी के भीतर यह चर्चा तेज है कि जांच में सामने आने वाले दस्तावेज भ्रष्टाचार के कथित नेटवर्क की नई परतें खोल सकते हैं। सेलरी स्लिप से भुगतान का रिकॉर्ड, सर्विस फाइल से नियुक्ति और पदोन्नति का इतिहास तथा संबंधित दस्तावेजों से पहचान और नियुक्ति प्रक्रिया की कड़ियां जांची जा सकती हैं।

फिलहाल इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच एजेंसी की ओर से नहीं हुई है। लेकिन यदि दस्तावेजों की जांच में कथित फर्जीवाड़े की पुष्टि होती है तो एमसीडी में नियुक्ति से लेकर लंबे समय तक निगरानी व्यवस्था तक कई स्तरों पर जवाबदेही तय करने की जरूरत पड़ सकती है।