एमसीडी के टोल टेंडर में 680 करोड़ के घोटाले का आरोप, नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने सीबीआई जांच की मांग उठाई
कहा- सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी को बाहर कर ब्लैकलिस्टेड कंपनी को ठेका दिया गया, निगम को 680 करोड़ का नुकसान पहुंचाया गया
नई दिल्ली, 5 अगस्त। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने टोल टैक्स टेंडर को लेकर भाजपा शासित एमसीडी पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि करीब 5500 करोड़ रुपये के टोल टेंडर में सबसे अधिक बोली लगाने वाली कंपनी को तकनीकी आधार पर बाहर कर 4820 करोड़ रुपये की बोली लगाने वाली कथित ब्लैकलिस्टेड कंपनी को ठेका दे दिया गया, जिससे निगम को लगभग 680 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने, टेंडर तत्काल निरस्त करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
अंकुश नारंग ने कहा कि उन्होंने 21 जुलाई 2026 को ही निगम प्रशासन को पत्र लिखकर चेताया था कि टोल टेंडर की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए और किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने की कोशिश न की जाए। इसके बावजूद उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर में जानबूझकर ऐसी शर्तें जोड़ी गईं, जिनसे प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई। सबसे अधिक 5500 करोड़ रुपये की बोली लगाने वाली कंपनी को तकनीकी आधार पर बाहर कर दिया गया, जबकि कम बोली लगाने वाली कंपनी को अनुबंध सौंप दिया गया। उनका दावा है कि इससे एमसीडी को सीधे तौर पर 680 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई और ब्लैकलिस्ट किए जाने की जानकारी सार्वजनिक होने के बावजूद उसे टेंडर दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि यह सही है तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला है, जिसकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए।
अंकुश नारंग ने कहा कि एमसीडी पहले से वित्तीय संकट का सामना कर रही है और कर्मचारियों के वेतन तथा विकास कार्यों के लिए धन की कमी बताई जाती है। ऐसे में अधिक राजस्व देने वाली बोली को छोड़कर कम राशि पर टेंडर देना कई सवाल खड़े करता है।
उन्होंने मांग की कि मौजूदा टेंडर को तत्काल रद्द कर खुली और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत दोबारा निविदा जारी की जाए। साथ ही पूरे प्रकरण की सीबीआई से जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
