नई दिल्ली। दिल्ली के विद्युत मंत्री आशीष सूद ने आम आदमी पार्टी की पूर्ववर्ती सरकार पर निजी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के साथ मिलीभगत कर दिल्लीवासियों पर हजारों करोड़ रुपये का बोझ डालने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि डिस्कॉम के सीएजी ऑडिट को मंजूरी देने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के हालिया फैसले ने पिछली सरकार की कथित वित्तीय अनियमितताओं और जवाबदेही से बचने की कोशिशों को उजागर कर दिया है।
सोमवार को जारी बयान में आशीष सूद ने कहा कि उनकी सरकार शुरू से मानती रही है कि बिजली कंपनियों और तत्कालीन ‘आप’ सरकार के बीच सांठगांठ थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2015 के एक फैसले का हवाला देकर यह प्रचारित किया गया कि डिस्कॉम का सीएजी ऑडिट नहीं कराया जा सकता, जबकि हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उस फैसले में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं था।
सूद ने कहा कि सीएजी ऑडिट के खिलाफ बिजली कंपनियों का अदालत जाना ही इस बात का संकेत है कि वे अपने खातों की जांच से बचना चाहती थीं। उनके अनुसार, ऑडिट न होने के कारण रेगुलेटरी एसेट्स के नाम पर दिल्ली की जनता पर लगभग ₹38,000 करोड़ का संभावित बोझ डाला गया।
उन्होंने दावा किया कि बिजली कंपनियों के घाटे या फंड की कमी का कोई स्पष्ट आधार सामने नहीं आया, इसके बावजूद पिछली सरकार ने उपभोक्ताओं पर भारी वित्तीय दायित्व छोड़ दिया। मंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी स्तर पर हुई गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आशीष सूद ने बताया कि उपराज्यपाल कार्यालय द्वारा सीएजी ऑडिट से जुड़ी प्रक्रिया के तहत बिजली कंपनियों को सुनवाई का अवसर देने के लिए नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार किया था।
मंत्री ने दिल्लीवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी उपभोक्ता पर अतिरिक्त बिजली शुल्क का बोझ न पड़े। उन्होंने कहा कि सीएजी ऑडिट पूरा होने के बाद यदि किसी प्रकार की अनियमितता या धोखाधड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, चाहे वे कितने भी प्रभावशाली पद पर क्यों न हों।
