नई दिल्ली, 27 जून 2026। कांग्रेस नेत्री नाज़िया दानिश ने राजधानी में नालों की सफाई के बाद निकाली गई सिल्ट को समय पर न हटाए जाने को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए भाजपा सरकार और एमसीडी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि नालों के किनारे कई दिनों तक पड़ी रही सिल्ट बारिश के साथ दोबारा नालों में बह गई, जिससे पूरे सफाई अभियान का उद्देश्य ही विफल हो गया।
नाज़िया दानिश ने कहा कि सरकार और नगर निगम ने नालों की सफाई का व्यापक प्रचार तो किया, लेकिन निकाली गई सिल्ट के वैज्ञानिक और समयबद्ध निस्तारण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की। यह प्रशासनिक कुप्रबंधन का स्पष्ट उदाहरण है, जिसका खामियाजा दिल्लीवासियों को जलभराव, ट्रैफिक जाम और गंदगी के रूप में भुगतना पड़ेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि हर वर्ष नालों की सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन यदि निकाली गई सिल्ट को समय पर नहीं हटाया जाता और वह दोबारा नालों में पहुंच जाती है, तो यह जनता के टैक्स के पैसे की खुली बर्बादी है।
नाज़िया दानिश ने मांग की कि नालों की सफाई और सिल्ट के निस्तारण में हुई लापरवाही की जवाबदेही तय की जाए तथा जिन अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की लापरवाही से यह स्थिति बनी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि राजधानी के सभी नालों से निकाली गई सिल्ट को तत्काल हटाकर उसके वैज्ञानिक एवं उचित निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि मानसून के दौरान दिल्लीवासियों को जलभराव जैसी गंभीर समस्याओं का सामना न करना पड़े।
अंत में नाज़िया दानिश ने कहा कि केवल फोटो खिंचवाने और प्रचार करने से दिल्ली की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। सरकार को दिखावे की राजनीति छोड़कर जवाबदेही तय करते हुए प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि राजधानी की जल निकासी व्यवस्था वास्तव में बेहतर बन सके।
