एनएचएआई अधिकृत पार्किंग में खुलेआम ओवरचार्जिंग का आरोप, बिना रसीद वसूली से वाहन चालक परेशान

पूर्वी दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के गांधी नगर स्थित कैलाश कॉलोनी रोड पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के पास संचालित अधिकृत पार्किंग में नियमों की अनदेखी और मनमानी वसूली के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की लगातार शिकायतों के बाद मौके पर की गई पड़ताल में कई गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए। पार्किंग का संचालन माइलस्टोन सिक्योरिटी एंड प्लेसमेंट सर्विस द्वारा किए जाने की बात बताई जा रही है।

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पार्किंग स्थल पर लगे शुल्क बोर्ड के अनुसार दोपहिया वाहन के लिए ₹10 प्रति घंटा तथा 24 घंटे के लिए ₹100 शुल्क निर्धारित है। चारपहिया वाहनों के लिए भी निर्धारित दरें प्रदर्शित हैं। आरोप है कि इसके बावजूद पार्किंग कर्मचारी तय शुल्क की बजाय मनमाने तरीके से कई गुना अधिक रकम वसूल रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि दोपहिया वाहन चालकों से ₹50 प्रति घंटा तक वसूले जा रहे हैं, जबकि अन्य वाहनों से भी निर्धारित शुल्क से कई गुना अधिक राशि ली जा रही है।

 

सबसे गंभीर आरोप यह है कि वाहन चालकों को पार्किंग की कोई रसीद या पर्ची नहीं दी जाती। बिना रसीद वसूली से जहां सरकारी राजस्व को नुकसान की आशंका जताई जा रही है, वहीं वाहन चोरी या किसी अन्य घटना की स्थिति में वाहन मालिक के पास यह साबित करने का कोई दस्तावेज नहीं रहता कि वाहन पार्किंग में खड़ा किया गया था। आरोप है कि पार्किंग कर्मी वाहन की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने से भी इनकार करते हैं और इसे वाहन मालिक की जिम्मेदारी बताते हैं।वाहन चालकों का कहना है कि पार्किंग शुल्क किसी तय नियम के बजाय कर्मचारियों की मर्जी से तय किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि निर्धारित दरों के अनुसार शुल्क लिया जा रहा होता तो रसीद देने में कोई परेशानी नहीं होती। बिना पर्ची वसूली पूरे मामले को संदेह के घेरे में खड़ा करती है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सार्वजनिक सुविधा के लिए बनाई गई पार्किंग को कमाई का जरिया बना दिया गया है। उनका कहना है कि मौके पर जाकर देखने पर शुल्क बोर्ड पर प्रदर्शित दरों और वास्तविक वसूली में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।

लोगों ने एनएचएआई और संबंधित विभागों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, पार्किंग संचालक के खिलाफ कार्रवाई करने, अवैध वसूली की जांच कराने तथा सभी वाहन चालकों को अनिवार्य रूप से रसीद जारी करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब पार्किंग शुल्क बोर्ड पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित है, तो निर्धारित दरों से कई गुना अधिक वसूली आखिर किसके संरक्षण में की जा रही है? यदि सरकारी एजेंसियों से जुड़ी पार्किंगों में भी इस तरह की मनमानी जारी रही, तो आम जनता का व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होगा।