रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स में अनुसूचित जाति के युवा उद्यमी की बड़ी छलांग, सरकारी सहायता से खड़ी की विश्वस्तरीय तकनीकी कंपनी

वेंचर कैपिटल फंड योजना से मिला 4.47 करोड़ रुपये का सहयोग, रडार प्रणाली, मुद्रित परिपथ पट्टिका और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों के निर्माण में बनी पहचान

नई दिल्ली, 2 अगस्त। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की अनुसूचित जाति वेंचर कैपिटल निधि (वीसीएफ-एससी) योजना देश में सामाजिक सशक्तीकरण के साथ-साथ उच्च प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों को भी नई दिशा दे रही है। इस योजना के सहयोग से बेंगलुरु की थ्रिशंकु टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड ने रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार प्रणाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों के निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

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कंपनी के निदेशक सुनील कुमार सिरिगिरी को वर्ष 2022 में योजना के तहत 4 करोड़ 47 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इस सहयोग से कंपनी ने कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड के उच्च प्रौद्योगिकी रक्षा एवं एयरोस्पेस पार्क में अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन एवं विनिर्माण इकाई स्थापित की।

इस इकाई में मुद्रित परिपथ पट्टिकाओं (पीसीबी), रडार प्रणालियों तथा एज कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों का निर्माण किया जा रहा है। कंपनी देश की प्रमुख संस्थाओं और उद्योगों को उन्नत इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण सेवाएं उपलब्ध करा रही है। इनमें लार्सन एंड टुब्रो, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की प्रयोगशालाएं, इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स, कैपजेमिनी, विप्रो तथा साइप्रेस जैसी संस्थाएं शामिल हैं।

योजना के तहत प्राप्त सहायता से अत्याधुनिक मशीनें, परीक्षण उपकरण और सॉफ्टवेयर खरीदे गए, जिससे कंपनी की तकनीकी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इससे रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए स्वदेशी तकनीकों के विकास को भी गति मिली है।

कंपनी ने अब तक 30 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराया है, जिनमें 8 अनुसूचित जाति तथा 22 अन्य वर्गों के कर्मचारी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त कंपनी ने 7 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां विकसित की हैं, 3 करोड़ 92 लाख रुपये की शुद्ध संपत्ति अर्जित की है, 2 करोड़ 85 लाख रुपये का कारोबार किया है तथा लगभग 4 लाख रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है।

सुनील कुमार सिरिगिरी ने कहा कि अनुसूचित जाति वेंचर कैपिटल निधि से प्राप्त रियायती वित्तीय सहायता ने उनके तकनीकी सपने को विश्वस्तरीय विनिर्माण उद्यम में बदलने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूत करते हुए रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक के विकास तथा कुशल रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय का कहना है कि यह योजना अनुसूचित जाति के उद्यमियों को उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में आगे बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहन देने, स्वदेशी विनिर्माण क्षमता मजबूत करने तथा गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजित करने की दिशा में प्रभावी भूमिका निभा रही है। मंत्रालय का मानना है कि इस प्रकार की पहलें समावेशी विकास और तकनीक आधारित आत्मनिर्भर भारत के निर्माण को नई मजबूती प्रदान कर रही हैं।